स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा प्लेटफार्म बनाने जा रही हरियाणा सरकार

हरियाणा में जिस खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की बागडोर कभी ताऊ देवीलाल और गुलजारी लाल नंदा सरीखी हस्तियों के हाथ में रही, उस बोर्ड को सरकार अब स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का बड़ा प्लेटफार्म बनाने जा रही है।

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हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के जरिये जहां हरखादी नाम से नए स्टोर खोले जाएंगे, वहीं हैफेड को खादी मित्र बनाते हुए उसके स्टोर पर इस बोर्ड की लघु ग्रामीण इकाइयों द्वारा तैयार स्वदेशी उत्पाद बिक्री के लिए रखे जा सकेंगे।

अभी तक हैफेड के करीब चार सौ स्टोर पर खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के उत्पाद बिक्री के लिए रखवाए जा चुके हैं।हरियाणा में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड 1969 से काम कर रहा है, जिसे पिछले वर्ष 50 साल पूरे हो चुके हैं। करनाल के भाजपा सांसद संजय भाटिया इस बोर्ड के 22वें चेयरमैन थे, जिनके बाद भाजपा की तेज तर्रार नेत्री गार्गी कक्कड़ को बोर्ड की पहली महिला चेयरपर्सन के रूप में काम करने का मौका मिला। 

कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी उद्योगों और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के संकेत के बाद खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। ग्रामोद्योग लगाने के लिए 20 हजार रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक के लोन के प्रोजेक्ट यह बोर्ड पास कर सकेगा।

महिला उद्यमियों के लिए 35 फीसदी, पुरुष उद्यमियों के लिए 25 फीसदी तथा आरक्षित क्षेणी के महिला व पुरुष उद्यमियों के लिए भी 35 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से किया गया है।

अब तक प्रदेश में 1700 से ज्यादा ग्रामोद्योग स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हेंं इस साल बढ़ाकर करीब ढ़ाई हजार तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इन ग्रामोद्योग के जरिये 14 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। बोर्ड का सालाना बजट करीब 14 करोड़ रुपये का है, जिसे लाभ में लाने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की गई है।

बोर्ड की चेयरपर्सन गार्गी कक्कड़ के अनुसार मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर पहली बार हरखादी ब्रांड के नाम से पंचकूला में पहला स्टोर खोला गया है।

दूसरा स्टोर झज्जर में महिला उद्यमी संचालित कर रही है। गुरुग्राम, नारनौल, फरीदाबाद व रेवाड़ी के हरखादी स्टोर खोलने की प्रक्रिया जारी है।

कोरोना की वजह से इनमें देरी हुई है। हैफेड के 400 स्टोर पर खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा तैयार उत्पाद साबुन, मेहंदी, अचार, मुरब्बा, सर्फ, एलोवेरा, शैंपू, कलर, तेल और धूपबत्ती समेत कई वस्तुएं बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

उन्‍होंने बताया कि रजाई, बेड शीट, शहद और खादी के बैग की विशेष डिमांड रहती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वोकल इंडिया का नारा देने के बाद ग्रामोद्योग इकाइयों का उत्साह और उनमें उत्पादन दोनों बढ़ेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा स्वदेशी के मूल मंत्र को प्रोत्साहन दिया जा सकेगा।

हरियाणा के खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को दूसरी बार औद्योगिक इकाइयों को कोयला उपलब्ध कराने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। 2007 में पहला प्रयोग हुआ था, लेकिन खास सफल नहीं हो पाया था।

अभी तक कोयले की एक रैक उतारी जा चुकी है, जबकि दो रैक का इंतजार है। बोर्ड की ओर से प्रदेश के 14 जिलों के डीसी को मास्क बनवाने के लिए खादी का कपड़ा प्रदान किया गया है, जो स्वयं सहायता समूहों तथा आइटीआइ की छात्राओं से तैयार कराए जा रहे हैं।

132 नई भॢतयों के प्रस्ताव के साथ हरियाणा सरकार अब अपने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का नया एक्ट बनाने की दिशा में भी तैयारी कर रही है। अगले विधानसभा सत्र में इस एक्ट का मसौदा पेश किया जा सकता है।

खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की चेयरपर्सन गार्गी कक्कड़ के अनुसार महात्मा गांधी, नरेंद्र मोदी और मनोहर लाल ने स्वदेशी को बढ़ावा दिया है। चरखा खादी को प्रोत्साहित करने का प्रतीक माना जाता है।

पंचकूला में सेक्टर दो के चौक पर चरखा स्थापित किया गया है। प्रदेश के पांच और शहरों में विभिन्न चौक पर चरखे स्थापित किए जा सकेंगे, ताकि स्वदेशी की भावना को प्रोत्साहन मिल सके। इन शहरों के नाम तय होने अभी बाकी हैं।

हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से तैयार कराए जाने वाले उत्पाद अब पुलिस कैंटीन में भी उपलब्ध कराए गए हैं। बोर्ड की चेयरपर्सन गार्गी कक्कड़ ने बताया कि जेलों में कैंटीन के भीतर भी इन उत्पादों को रखवाने की योजना है।

इस बारे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मंजूरी हासिल की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करने की दिशा में नई इकाइयों की स्थापना पर भी बोर्ड का जोर रहेगा।

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