द फाइटर, द सर्वाइवर, द सिक्‍सर किंग, अंडर 19 वर्ल्‍ड कप में प्‍लेयर ऑफ द टूर्नामेंट, क्रिकेट वर्ल्‍ड कप में प्‍लेयर ऑफ द सीरीज- ये सारे नाम और अवॉर्ड एक ही खिलाड़ी के लिए हैं. टीम इंडिया के इस जांबाज खिलाड़ी ने टी20 व्‍र्ल्‍ड कप में इंग्‍लैंड के स्‍टुअर्ट ब्रॉड की छह गेंदों पर छह छक्‍के लगाकर रिकॉर्ड बनाया था. लेकिन वही खिलाड़ी आज एक-एक रन के लिए तरस रहा है. युवराज सिंह उम्र के इस पड़ाव पर ऐसे फॉर्म से जूझ रहे हैं कि छह मैचों में उनके बल्‍ले से बमुश्किल एक सिक्‍सर निकला है. वो भी आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में जिसमें संजू सैमसन जैसा नया खिलाड़ी भी एक पारी में 10 छक्‍के लगा रहा है. धीमी स्‍कोरिंग के लिए अक्‍सर आलोचना झेलने वाले अजिंक्‍य रहाणे जैसे खिलाड़ी के नाम भी छह मैच में तीन सिक्‍सर हैं.

लेकिन युवराज सिंह इनसे अलग हैं. उनके पास 304 वनडे और 58 टी20 अंतरराष्‍ट्रीय मैचों का अनुभव है. एक दिन पहले ही उन्‍होंने कहा कि वे 2019 के बाद संन्‍यास पर फैसला लेंगे. यानी उन्‍हें अब भी उम्‍मीद है कि 2019 की वर्ल्‍ड कप टीम में उनके लिए गुंजाइश हो सकती है. लेकिन उनके हालिया परफॉर्मेंस देखकर ऐसा नहीं लगता.

युवराज ने छह मैच की चार पारियों में कुल 50 रन बनाए हैं. इसके लिए उन्‍होंने 56 गेंद खेली है. उनका स्‍ट्राइक रेट 100 से भी कम है. जबकि युवराज का आईपीएल में करियर स्‍ट्राइक रेट 130 से ज्‍यादा का है. उन्‍होंने आईपीएल में अब तक 126 मैचों में 25.11 की औसत से 2637 रन बनाए हैं. 2017 में उन्‍होंने 12 मैचों में 28 की औसत से 252 रन बनाए थे. आईपीएल के मौजूदा सीजन में युवराज खुल कर शॉट्स तो नहीं ही लगा पा रहे, क्रीज पर टिक कर भी नहीं खेल पा रहे हैं.

युवराज के ऑलराउंड खेल का दूसरा पहलू उनकी बॉलिंग है. इस साल कप्‍तान उन पर बॉलिंग का भरोसा भी नहीं दिखा पा रहे. 6 मैचों में युवराज ने अब तक 2 ओवर की गेंदबाजी की है. उन्‍हें कोई विकेट नहीं मिला है और 11 से ज्‍यादा की औसत से रन दिए हैं.

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युवराज अब उम्र के 37वें वर्ष में हैं. कैंसर से लड़ चुके हैं. अब उनके रिफ्लेक्‍सेस कमजोर हो रहे हैं. किंग्‍स इलेवन पंजाब की टीम में उनकी बैटिंग की पॉजीशन को एक से ज्‍यादा बार बदला जा चुका है. कोई आश्‍चर्य नहीं कि एक-दो मैचों के बाद प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ तो उन्‍हें टीम से बाहर भी किया जा सकता है.