भारत-पाकिस्तान के संघर्ष से प्रभावित हो रहे हैं केरल के किसान

वैसे तो केरल का पाकिस्तान से कोई सीधा संबंध नहीं है। जल या थल से भी इसकी सीमा पाकिस्तान से नहीं लगती है। मगर, भारत-पाक तनाव का सीधा असर यहां के किसानों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि यहां के किसान भगवान से अच्छी बारिश करने के साथ ही दोनों देशों के बीच जल्द ही संबंध अच्छे होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

अब आप सोच रहे होंगे कि भारत-पाकिस्तान सीमा से करीब 3000 किमी की दूरी पर स्थित इस गांव के लोगों पर दोनों देशों की तल्खी कैसे भारी पड़ रही है। मगर, हम आपको बता दें कि यहां पैदा होने वाले पान के पत्तों को बड़े पैमाने पर पाकिस्तान में भेजा जाता था, जो दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण बंद सा हो गया है। तिरूर के सैकड़ों किसानों की आजीविका इन्हीं पान के पत्तों पर चलती है।

तिरूर तालुक के ओझूर, थानाल्लुर, चेंब्रा, मोरी और पेयपुरम गांवों के किसानों के लिए यहां का प्रसिद्ध तिरूर लंका पान समृद्धि का कारण था। मगर, हालात बदलने के बाद किसानों के लिए साल 2016 से पहले जो पान अच्छा आय का स्रोत था, वह अब एक बोझ बन गया है।

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आजादी के पहले तिरूर रेलवे स्टेशन पर माल गाड़ियों में कम से कम एक कंटेनर में यहां के पान के पत्ते रखे जाते थे। इन्हें चेन्नई, दिल्ली और लाहौर के जरिये पाकिस्तान को निर्यात किया जाता था। साल 1989-90 के दौरान जब वीपी सिंह भारत के प्रधान मंत्री थे, तब तिरूर पान ने किसानों और व्यापारियों को बहुत अच्छा रिटर्न दिया। उन दिनों 100 पान के पत्तों के बदले में 70 रुपए मिलते थे, जो काफी अधिक थे।

यहां तक कि साल 1965, 1971 और 1999 में युद्ध के दौरान भी पान का व्यापार प्रभावित नहीं हुआ था। साल 2016 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से उनके जन्मदिन पर मुलाकात की थी, तो तिरूर के किसानों का मानना था कि उनका उत्पादन की अच्छी कीमत मिलेगी। मगर, दोनों देशों के बीच बढ़ती तनातनी के बीच सीमा पार से व्यापार बर्बाद हो गया।

21 जून 2016 को पाकिस्तान सरकार ने तिरूर के पान के पत्ते पर 140 फीसद आयात कर लगा दिया। इससे केरल के पान का बिजनेस चौपट हो गया। प्रभावित पाकिस्तानी आयातकों ने श्रीलंका से पान आयात करना शुरू कर दिया, जिसका स्वाद तिरूर के पान के जैसा था। तिरूर लंका के पान की कीमत 70 रुपए प्रति बंडल से घटकर 29 रुपए प्रति बंडल हो गई। लिहाजा, अब केरल के किसानों को आजीविका चलाने में काफी परेशानी हो रही है।

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