1981 में दायर किये गये पेंशन केस का आया फैसला

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पेंशन के लिए लंबे समय तक संघर्ष करते-करते एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का पिछले साल देहांत हो गया, लेकिन सरकार ने पेंशन पर कोई निर्णय नहीं किया. 1981 में किये गए आवेदन पर आखिरकार कोर्ट का फिसला आया. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को पेंशन नहीं दिए जाने पर हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रवैया अपनाते हुए राज्य सरकार पर साढ़े तीन लाख रुपये जुर्माना लगाने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देहरादून जिले के सतेश्वर शर्मा की विधवा को एक माह के भीतर 1981 से अब तक की पेंशन का भुगतान करने के आदेश दिया है.

देहरादून निवासी राजेश्वरी शर्मा ने याचिका दायर कर बताया कि उनके पति सतेश्वर शर्मा ने 1942 में 12वीं की पढ़ाई के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और वह 40 दिन जेल में भी रहे जिसकी वजह से उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था.

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पेंशन नियमावली-1975 के तहत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को दी जाने वाली पेंशन व अन्य सुविधाओं के लिए 1981 में आवेदन किया था, उनके द्वारा राज्य स्तर से लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक को प्रार्थना पत्र भेजे गए, उनके प्रकरण को तमाम स्तरों पर लटकाया गया, जबकि ऐसे अन्य मामलों में पेंशन का भुगतान किया गया था.

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