फीफा विश्व कप 2018: विश्व कप से बाहर हुआ जर्मनी, द. कोरिया ने 2-0 से दी मात

नई दिल्ली। जर्मन फुटबॉल के इतिहास में बुधवार की रात सबसे काली रात साबित हुई। मौजूदा विश्व चैंपियन 2018 विश्व कप में अपने से बेहद कमजोर दक्षिण कोरियाई टीम से 0-2 से हारकर बाहर हो गई। ग्र्रुप एफ के इस अहम मुकाबले में जर्मनी को नॉकआउट राउंड में पहुंचने के लिए कोरिया पर जीत की दरकार थी लेकिन 2014 विश्व कप की विजेता टीम के खिलाड़ी, कोरिया के मजबूत डिफेंस और अपने सुस्त खेल के कारण विश्व कप इतिहास में पहली बार ग्र्रुप स्टेज से बाहर हो गए।फीफा विश्व कप 2018: विश्व कप से बाहर हुआ जर्मनी, द. कोरिया ने 2-0 से दी मात

पहले हाफ टाइम तक गेंद पर जर्मनी ने ही ज्यादातर समय नियंत्रण बनाए रखा। एशियाई दिग्गज दक्षिण कोरिया ने गोल करने के कुछ अच्छे मौके बनाए। खेल के 19वें मिनट में दक्षिण कोरिया को जर्मनी के डी के बाहर एक फ्री किक मिली जिसे कोरियाई खिलाड़ी जंग जर्मन गोलकीपर मैनुअल नॉयर के हाथों में मार बैठे। हालांकि गेंद नॉयर के हाथों से छिटकी। जब तक कोरियाई कप्तान सोन गेंद को किक करने का प्रयास करते, उससे पहले ही नॉयर ने दूसरे प्रयास में गेंद को बैक लाइन से बाहर कर दिया। पहले हाफ में जर्मनी के हर आक्रमण को रोकने के लिए कोरिया के डिफेंडर ने लगातार मुस्तैदी दिखाई। पहले हाफ में जर्मनी की परंपरागत शैली भी देखने को नहीं मिली। लंबे पास के लिए जर्मनी की टीम मशहूर है लेकिन उसका वह अंदाज इस मुकाबले में देखने को नहीं मिला। 

चो वुंग-हू के बचाव : दूसरा हाफ शुरू होते ही जर्मनी ने अपने खेल की रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। जल्दी ही कोच जोकिम लो ने खेदिरा की जगह गोमेज और गोरेज्का की जगह मूलर को मैदान में उतारा। खेल के 69वें मिनट में गोमेज के हेडर को कोरियाई गोलकीपर ने बेकार किया और फिर यह काम उन्होंने कई मौकों पर किया। खेल के 89वें मिनट में किमिक के क्रॉस को भी उन्होंने बेकार कर दिया। 

इंजुरी टाइम का रोमांच : निर्धारित समय के बाद रेफरी ने छह मिनट का इंजुरी टाइम जोड़ा। इंजुरी टाइम के दूसरे मिनट में कोरिया को कॉर्नर किक मिला। कप्तान सोन के कॉर्नर पर जर्मनी के डिफेंडरों की गलती के बाद किम यंग-ग्योन ने गेंद को गोल पोस्ट में डालकर कोरिया को 1-0 की बढ़त पर ला दिया। एक गोल खाने और इंजुरी टाइम होने के कारण जर्मनी के गोलकीपर भी डिफेंडरों और स्ट्राइकरों के साथ कोरियाई गोलपोस्ट की तरफ आक्रमण के लिए निकल गए लेकिन यह चूक उन पर और भारी पड़ी। जब जर्मन खिलाड़ी कोरियाई गोलपोस्ट की तरफ थे तो विपक्षी टीम के खिलाडिय़ों ने लंबे पास के जरिये गेंद को जर्मन गोलपोस्ट की तरफ ढकेल दिया और सोन ने एक और गोल करके कोरिया को 2-0 की अप्रत्याशित बढ़त दिला दी। 

जोकिम की रणनीति बेकार : इस विश्व कप में भाग ले रहीं टीमों में सबसे महंगे कोच जोकिम लो ने इस मुकाबले के लिए अपनी टीम में पांच बदलाव किए। जर्मन कोच ने अपने मुख्य खिलाड़ी मूलर सहित ड्रैक्सेलर, रुडिगर और रूडी को बेंच पर बिठाया जबकि जेरोम बोएटेंग निलंबन की वजह से इस मुकाबले में खेलने नहीं उतरे। इन पांचों की जगह ओजिल, खेदिरा, हुमेल्स, गोरेज्का और सुले को टीम में जगह मिली। मूलर जैसे बड़े खिलाड़ी को शुरुआती लाइन-अप से बाहर बैठाना थोड़ा हैरान करने वाला फैसला था। जोकिम लो की देखरेख में ही जर्मनी ने 2014 विश्व कप का खिताब जीता था और उनके पास मौका था कि वह लगातार दूसरी बार अपनी कोचिंग में जर्मनी को चैंपियन बना सकें। 2006 में उन्हें जर्मनी का कोच बनाया गया था और 2022 तक उनके करार को हाल ही में बढ़ाया गया। जोकिम को 3.8 मिलियन यूरो (करीब 30 करोड़ रुपये) सालाना मिलते हैं। 

टीम, साल, अगले विश्व कप में स्थिति

फ्रांस, 1998, ग्रुप स्टेज से बाहर

इटली, 2006, ग्रुप स्टेज से बाहर

स्पेन, 2010, ग्रुप स्टेज से बाहर

जर्मनी, 2014, ग्रुप स्टेज से बाहर

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