काबुल में धमाकों के डर से बढ़ा ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार

अफगानिस्तान में आजकल ऑनलाइऩ शॉपिंग का क्रेज़ बढ़ता जा रहा है. लेकिन इसके पीछे कारण विकसित देशों में की जाने वाली ऑनलाइन शॉपिंग से अलग हैं. जहां विकसित देशों में अमूमन लोग समय की कमी की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं वहीं अफगानिस्तान में लोगों का झुकाव इस तरफ इसलिए बढ़ रहा है ताकि वो बम ब्लास्ट से होने वाली मौतों, दुर्घटनाओं व छेड़छाड़ से बच सकें. काबुल में धमाकों के डर से बढ़ा ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार

फिर चाहें वो कोई फर्नीचर हो या फिर कोई फैशन प्रोडक्ट. पिछले दो साल में दर्जनों स्टार्ट अप्स ने अच्छा कारोबार किया है इनमें से कुछ ही ऐसे हैं जिनके ऑफलाइन स्टोर भी हैं. काबुल में इस साल हुए आत्मघाती हमलों और दूसरे बम धमाकों में सैकड़ों लोग मारे गये और काफी लोग घायल हुए. अफगानिस्तान में इस साल अक्टूबर में संसदीय चुनाव होने हैं. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि सुरक्षा इंतजाम और बिगड़ सकते हैं. यहां महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं.

कुछ नये रिटेलर जैसे कि AzadBazar.af, afom.af, JVBazar.com और zarinas.com कॉस्मेटिक, कम्प्यूटर प्रोडक्ट, रसोई का सामान, रियल स्टेट, फर्नीचर, कालीन और कार बेच रहे हैं. एक वेबसाइट तो विदेशी ब्रैंड्स का भी प्रचार कर रही है, जिसमें रोलेक्स, एडिडास और ज़ारा शामिल हैं. अभी पढ़ाई कर रहीं अलिसा सुलैमानी ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में कहती हैं,  “युद्ध के माहौल में ऑनलाइन खरीददारी अच्छा अनुभव है.” अफगानिस्तान की 60 फीसदी आबादी की उम्र अभी 25 साल से कम है जिनमें से एक बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन यूजर्स का है.

अलिसा कहती हैं, “आज के समय में बाहर जाकर खरीददारी करने की हिम्मत कौन करेगा? कुछ लोग ऐसे ज़रूर होंगे जिन्हें बाहर जाकर खरीददारी करना पसंद हो लेकिन मेरे लिए ये हमेशा मुश्किल रहा है. धमाकों का डर और यौन हिंसा का डर ऐसा है जो आपके पीछे आपकी परछाई की तरह चलता है.”

28 साल के तमीम रासा ने आठ महीने पहले 30,000 डॉलर के निवेश के साथ Rasa Online शुरू किया था. उन्होंने इन आठ महीनों में 60 से ज्यादा स्टोर्स और दुकानदारों के साथ कॉन्ट्रै्क्ट किया है. उनके 80 फीसदी ग्राहक महिलाएं हैं जो कॉस्मेटिक प्रोडक्ट खरीदती हैं. Rasa Online का कोई स्टॉक रूम नहीं है, इसके सिर्फ ऑफिस हैं.

तमीम रासा कहते हैं, “हम ग्राहकों, बड़े स्टोर्स और दुकानदारों के बीच ब्रिज़ बनाने का काम करते हैं. एक महीने पहले तक हमारे लिए खर्चा निकालना मुश्किल था, हम घाटे में थे लेकिन अब हम 14 से 42 डॉलर तक का मुनाफा कमा रहे हैं. यानी की हम आगे बढ़ रहे हैं.” तमीम अपने कारोबार को पश्चिम के हेरात प्रांत, दक्षिण के कंधार, उत्तर के बल्ख और पूर्व के नंगरहर में बढ़ाना चाहते हैं जिसकी सीमा पाकिस्तान से लगती है.

27 साल के एशमतुल्लाह अफगान मार्ट के मालिक हैं. उन्होंने करीब एक साल पहले एक दुकान खोली थी जिसमें करीब 7000 डॉलर के सामान हैं. वो कहते हैं, “बड़ी कंपनियों ने मुझसे संपर्क किया कि मैं उनके इम्पोर्टेड सामनों की बिक्री करूं. हर रोज करीब 50 ग्राहक मुझे कॉल करते हैं और हम उन्हें डिलीवर करते हैं.” एशमतुल्लाह भी इस साल के आखिर तक अपने कारोबार को बढ़ाना चाहते हैं. एशमतुल्लाह के मुताबिक सबसे बड़ी मुश्किल सुरक्षा की थी, शहर में एक ब्लास्ट होता था और कुछ ही समय में ही उसी इलाके में फिर ब्लास्ट होता था. हमलों के डर और ट्रैफिक से बचने के लिए ज्यादातर लोग मुख्य रास्तों से नहीं बल्कि घरों, पतली गलियों, और बगीचों के बीच से होते हुए बाहर जाते हैं.

एशमतुल्लाह के मुताबिक काबुल में हुए धमाकों की वजह से डिलिवरी सर्विस पर असर पड़ता है. वो कहते हैं, “जब कहीं धमाके होते हैं तो हम उस इलाके में डिलीवरी रोक देते हैं.” हालांकि एशमतुल्लाह मानते हैं कि उनके व्यापार के तेजी से बढ़ने के पीछे लोगों में असुरक्षा की भावना होना एक बड़ा कारण है. असुरक्षा के अलावा काबुल की सड़कों पर महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा भी इसकी एक बड़ी वजह है. प्रोडक्ट की डिलीवरी मोटरसाइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से की जाती है. डिलीवरी करने वाले शख्स को महीने में करीब 112 डॉलर मिलते हैं.

कॉमर्स मंत्रालय के प्रवक्ता मुसाफर क्योकांदी कहते हैं, “ऐसे देश में जो पिछले चार दशक से युद्ध झेल रहा हो वहां ऑनलाइन शॉपिंग एक अलग अनुभव है. ऐसी करीब 50 कंपनियां हैं. जिनमें से ज्यादातर के पास अभी लाइसेंस नहीं है.” मुसाफर क्योकांदी कहते हैं, “काबुल में ऑनलाइन स्टोर्स का चलन दो साल पहले ही शुरू हुआ है. फिलहाल 20 ऐसे ऑनलाइन स्टोर्स हैं जिनके पास व्यापार करने का लाइसेंस है. बहुत से ऐसे दुकानदार हैं जिनके पास अभी लाइसेंस नहीं है, हम ऐसे दुकानदारों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि वो भी लाइसेंस लें.”

“पूरी दुनिया में ऑनलाइन स्टोर्स सालाना अरबों डॉलर का कारोबार कर रहे हैं. यह वक्त हमारे लिए है कि हम भी इस वर्ग में शामिल हों. जब हम अफगानिस्तान में ऐसे स्टोर्स देखते हैं तो हममें भी ऐसी उम्मीद जगती है.” पढ़ाई कर रहे रोया शाकेब भी इससे सहमत हैं, वो कहते हैं, “मुझे परीक्षा के लिए कुछ किताबों की जरूरत थी. मैने लाइब्रेरी और दुकानें तलाश कीं लेकिन मुझे वो किताबें नहीं मिलीं, तब मैंने ऑनलाइन किताबें तलाश की. अगले दिन किताबें मेरे घर पर थीं.’​

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