बिहार में अभी से बिछने लगी मिशन 2019 के लिए चुनावी बिसातें

पटना। लोकसभा चुनाव अगर नियत समय पर हुए तो अब छह महीने रह गए हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है, वहीं दिग्गज सुरक्षित सीट की तलाश में दिल बदलने की तैयारी में लग गए है। पिछले महीने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दौरे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी मुलाकात के बाद किस्मत आजमाने वालों की उम्मीद परवान पर है। चर्चा है कि जल्द ही एनडीए में इस बात पर सहमति बन जाएगी कि कौन दल कितनी सीटों पर कहां कहां चुनाव लड़ेगा। संभावना है कि सितंबर के आखिर तक सीटों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।बिहार में अभी से बिछने लगी मिशन 2019 के लिए चुनावी बिसातें

भाजपा ने चुनाव पूर्व जो सर्वे कराए हैं उसके मुताबिक वाल्मीकिनगर, गोपालगंज, महाराजगंज, शिवहर, झंझारपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर, खगडिय़ा, गया, बक्सर और सासाराम जैसी एक दर्जन से अधिक सीटों पर उत्साहजनक रिपोर्ट नहीं मिली है। ऐसे में एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए एनडीए इन सीटिंग सीटों पर नये चेहरे उतार सकता है। 

तेजी से बदले राजनीतिक हालात में लगभग तय हो गया है कि पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, दरभंगा से भाजपा सांसद कीर्ति आजाद, वैशाली से लोजपा सांसद रामकिशोर सिंह और खगडिय़ा से लोजपा सांसद चौधरी महबूब अली कैसर इस बार एनडीए के प्रत्याशी नहीं होंगे।

शत्रुघ्न सिन्हा के पटना साहिब से ही राजद, कीर्ति आजाद के दरभंगा से ही कांग्रेस, रामकिशोर सिंह के शिवहर से राजद और चौधरी महबूब अली कैसर के खगडिय़ा से ही कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडऩे की संभावना है। मधेपुरा में गुरु-शिष्य के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने का मिल सकता है।

एनडीए के खिलाफ मोर्चा खोले शरद यादव का राजद खेमे से लडऩा तय है। जदयू से कभी उनके शिष्य रहे राज्य के लघु सिंचाई मंत्री दिनेश चंद्र यादव ने लडऩे की तैयारी शुरू कर दी है। खगडिय़ा से दिनेश चंद्र यादव 2009 का चुनाव जीते थे। लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव वह हार गए थे।इस बार खगडिय़ा से भाजपा के सम्राट चौधरी का लडऩा तय माना जा रहा है। भाजपा ने  हाल ही में उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। 

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के एनडीए छोड़कर राजद से हाथ मिला लेने के बाद यह तय है कि वह महागठबंधन की ओर से गया से प्रत्याशी होंगे। गया भाजपा की परम्परागत सीट रही है। ऐसे में वहां से सांसद हरि मांझी का टिकट कट जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। वैसे भी गनौरी मांझी को भाजपा ने नित्यानंद की टीम में शामिल करके इसके संकेत दे दिए हैं। सासाराम से छेदी पासवान की जगह  विधायक ललन पासवान को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा है। एंटी इनकंबेंसी रोकने के लिए अश्विनी चौबे को बक्सर से भागलपुर और गिरिराज सिंह को नवादा से बेगूसराय भेज दिया जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। 

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