पेट्रोल-डीजल में अंतर, पहले कभी नहीं हुआ

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शुक्रवार को नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 74.63 रुपए प्रति लीटर थी, जबकि डीजल 65.93 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर था। दोनों के बीच का अंतर घटकर 8.70 रुपए प्रति लीटर रह गया है। ठीक दो वर्ष पहले यह अंतर 13.92 रुपए प्रति लीटर का था। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इतना कम अंतर पहले कभी नहीं रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर कार बाजार पर दिखाई दे रहा है। देश में डीजल चालित कारों की बिक्री तेजी से घट रही है। डीजल इंजन वाली कारों की हिस्सेदारी इन दो वर्षों में 44 फीसदी से घट कर 35 फीसदी रह गई है।

दस साल पहले 20 रुपए था अंतर

करीब एक दशक पहले पेट्रोल व डीजल की कीमतों में 20 रुपए का अंतर था। यह इसलिए था क्योंकि सरकार डीजल पर ज्यादा सब्सिडी देती थी। लेकिन अक्टूबर 2014 में सरकार ने डीजल को सरकारी नियंत्रण से बाहर कर कंपनियों को लागत के आधार पर इसकी बाजार कीमत तय करने का अधिकार दे दिया। इससे पहले पेट्रोल को यूपीए सरकार जून 2010 में नियंत्रण-मुक्त कर चुकी थी। अब तेल कंपनियां पेट्रोल व डीजल की कीमत बाजार व लागत के अनुसार रोजाना तय करती हैं। इसलिए दोनों ईंधनों में कीमत का अंतर तेजी से घट रहा है।

डीजल कारों की हिस्सेदारी घटी

इसका नतीजा यह हुआ है कि देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी की कारों की बिक्री में डीजल कारों की हिस्सेदारी 35 फीसदी से घटकर 29 फीसदी रह गई है। मारुति सुजुकी के अध्यक्ष आर. सी. भार्गव का कहना है कि “बीएस-6 ईंधन की बिक्री शुरु होने के बाद डीजल कारों की बिक्री और घटेगी।

बीएस-6 मानक में पेट्रोल के मुकाबले डीजल को बेहतर व साफ ईंधन बनाने में ज्यादा लागत आती है।” सरकार ने अप्रैल, 2020 से देश भर में सिर्फ बीएस-6 ईंधन बेचने का फैसला किया है जिसे कम प्रदूषण फैलाने वाला माना जाता है। अभी यह दिल्ली में उपलब्ध है। तेल कंपनियां अभी इस पर बढ़ी लागत नहीं वसूल रही हैं।

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सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल के एक अधिकारी के मुताबिक बीएस-6 मानक आधारित डीजल तैयार करने पर अभी 66 पैसे प्रति लीटर अतिरिक्त लागत आ रही है जबकि पेट्रोल में यह 24 पैसे प्रति लीटर अधिक पड़ती है।

कार उद्योग के सूत्रों का कहना है कि डीजल कारों की बिक्री की रफ्तार पिछले दो वर्षों से ज्यादा तेजी से कम हुई है। कीमत के अतिरिक्त डीजल को लेकर बाजार में संशय भी काफी ज्यादा है कि पता नहीं कब सरकार या न्यायालय की तरफ से प्रदूषण को लेकर डीजल पर कोई बड़ा प्रतिबंध लग जाए।

डीजल वाहनों की अवधि 10 वर्ष तय करने की वजह से भी ग्राहकों का रुझान कम हुआ है। कॉमर्शियल वाहनों और टैक्सी में भी डीजल के मुकाबले सीएनजी का इस्तेमाल अधिक हो रहा है। मारुति सुजुकी के कारों में डीजल व पेट्रोल की हिस्सेदारी 35:65 फीसदी की थी जो अब घट कर 29:71 फीसदी की रह गई है।

डीजल की बढ़ती कीमत का असर स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) पर भी हुआ है। इस वर्ग में डीजल इंजन वाले वाहनों की हिस्सेदारी 80 से घटकर 50 फीसदी पर आ गई है। मारुति सुजुकी, हुंडई, महिंद्रा, टोयोटा, होंडा जैसी कार कंपनियों के ज्यादातर नए वाहन पेट्रोल इंजन पर ही आधारित होंगे।

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