वायु प्रदूषण से जंग में दिल्ली सरकार फिर हुई बेपर्दा, अहम बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी

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वायु प्रदूषण और दिल्लीवासियों की सेहत को लेकर दिल्ली सरकार कितनी संजीदा है, यह एक बार फिर बेपर्दा हो गया है। दिल्ली के वायु प्रदूषण पर भूविज्ञान मंत्रालय में बैठक बुलाई गई थी लेकिन इसमें दिल्ली का कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा।

वायु प्रदूषण से जंग में दिल्ली सरकार फिर हुई बेपर्दा, अहम बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी

दिल्ली सरकार का उदासीन रवैया

इंडो (भारत)- यूके (इंग्लैंड) की साझेदारी में बृहस्पतिवार को भूविज्ञान मंत्रालय में बैठक रखी गई थी। बैठक का एजेंडा दिल्ली की हवा में बढ़ता प्रदूषण और उससे मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रभाव था। इसमें उन पांच प्रोजेक्टों पर चर्चा की जानी थी जिन पर इंडो-यूके साझेदारी में काम शुरू किया जाना है। लेकिन, सुबह 10 से शाम चार बजे तक चली बैठक बेनतीजा ही खत्म करनी पड़ी। वजह, दिल्ली सरकार का उदासीन रवैया। 

अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे

इस बैठक में केंद्रीय परिवहन एवं रेल मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मौसम विभाग एवं विभिन्न गैर सरकारी एजेंसियों सहित इंग्लैंड के विशेषज्ञ तक पहुंचे, लेकिन दिल्ली की हाजिरी तक नहीं लग पाई। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, परिवहन विभाग, पर्यावरण विभाग, ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम इत्यादि कहीं से कोई अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचा। बैठक में सीपीसीबी के पूर्व सदस्य सचिव बी सेन गुप्ता, पूर्व अपर निदेशक डॉ. एसके त्यागी और भारतीय मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक अजीत त्यागी भी पहुंचे, लेकिन दिल्ली के जिन अधिकारियों का सीधा सरोकार है, वे नदारद रहे।

क्रियान्वयन में खामियां हैं

हालांकि, बैठक में चर्चा हुई कि दिल्ली का लगातार बढ़ता एयर इंडेक्स कैसे कम किया जाए? पांचों प्रोजेक्ट के कुछ पहलुओं पर भी बात हुई कि कैसे दिल्ली की हवा में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्वों को कम किया जाए? इंग्लैंड के पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना था कि इमरजेंसी के हालात के अलावा सामान्य स्थिति में भी रोकथाम के लिए प्रयास जारी रखे जाएं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में योजनाएं तो तमाम हैं मगर क्रियान्वयन में खामियां हैं।

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ठोस निर्णय नहीं हो सका

बैठक में दिल्ली के अधिकारियों का न पहुंचना चिंताजनक है। ऐसा लगता है कि कोई गंभीर नहीं है। बैठक में चर्चा भले हुई लेकिन न कोई ठोस निर्णय हो सका और न ही भविष्य के लिए कोई रणनीति तैयार की जा सकी। -रोहित मगोत्रा, समन्वयक एवं उप निदेशक, इंटीग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट (इराडे)

यह पहली बार नहीं हुआ है

दिल्ली सरकार वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ दिल्ली के प्रदूषण पर एक साल लंबा अध्ययन कराने जा रही है, लेकिन जिन देशों के विशेषज्ञ स्वयं यहां वायु प्रदूषण पर काम करने आ रहे हैं, उन्हें तवज्जो नहीं दी जा रही। यह पहली बार नहीं हुआ है। दिल्ली सरकार के अधिकारी ईपीसीए और सीपीसीबी की बैठकों से भी अक्सर नदारद रहते हैं। -डॉ. एसके त्यागी, पूर्व अपर निदेशक, सीपीसीबी 

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