खुद को दोहरा रहा इतिहास, सरकारों को बर्खास्‍त करने में पीछे नहीं थी कांग्रेस

नई दिल्‍ली। ऐसा कहा गया है कि समय और इतिहास खुद को दोहराता है, कुछ ऐसा ही कर्नाटक की राजनीति में देखने को मिल रहा है। जिस तरह के आरोप कांग्रेस की ओर से भाजपा और राज्‍यपाल के खिलाफ लगाए जा रहे हैं इससे यही पता चलता है कि कांग्रेस खुद का किया भूल गयी है। सत्ता का दुरुपयोग कर राज्य सरकारों को बर्खास्त करने, सबसे बड़े दल को सरकार बनाने से रोकने की तमाम कोशिशें कर चुकी कांग्रेस आज कर्नाटक में राज्यपाल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। बोम्‍मई केस समेत कांग्रेस की केंद्र सरकार के इशारे पर विभिन्न राज्यों में राज्यपालों द्वारा सरकार बर्खास्त करने या गलत निर्णय लेने के ढेरों उदाहरण हैं।

कांग्रेस ने ही शुरू की थी यह परिपाटी

विरोधी सरकारों को बर्खास्त करने और विपक्षी दलों को सरकार बनाने से रोकने जैसे कई कामों में कांग्रेस पहले खुद ही गवर्नर के ऑफिस का इस्तेमाल कर चुकी है। कर्नाटक का बोम्‍मई केस भी इसका सटीक उदाहरण है।

भाजपा शासित चार राज्‍यों की सरकारें हुईं थीं बर्खास्‍त

सन 1992 में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने भाजपा शासित चार राज्यों में सरकारें बर्खास्त कर दी थीं। इससे पहले भी कई राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता रहा, जिसमें 1988 में कर्नाटक में एसआर बोम्मई की सरकार की बर्खास्तगी का मामला शामिल है। 1994 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के सामने इन तमाम मामलों को लेकर सुनवाई हुई, जिसे बोम्मई केस के नाम से जाना जाता है।

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