CM योगी ने कैबिनेट बैठक में दी चार प्रस्तावों को मंजूरी, दुधवा तक बनेगी सड़क

- in उत्तरप्रदेश, लखनऊ

पर्यटकों को आवागमन की बेहतर सुविधा देने के लिए लखीमपुर से दुधवा नेशनल पार्क तक पेव्ड शोल्डर के साथ टू लेन सड़क बनाई जाएगी। 63.650 किलोमीटर लंबी सड़क को 250.19 करोड़ रुपये की लागत से बनाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

नेपाल से सटे लखीमपुर खीरी में 680 वर्ग किलोमीटर का दुधवा राष्ट्रीय उद्यान है। लखीमपुर से दुधवा जाने वाला मार्ग सिफी 3.7 मीटर या 7 मीटर ही चौड़ा है, जिससे पर्यटकों को दिक्कतें होती हैं। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस मार्ग पर पीसीयू (पैंसेजर कार यूनिट) 11500 है, जबकि टू लेन विद पेव्ड शोल्डर (10 मीटर चौड़ाई) सड़क बनाने के लिए पीसीयू 15000 होनी चाहिए। वहीं, 200 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत के प्रस्ताव कैबिनेट में लाने का प्रावधान है। इसलिए पीसीयू मानकों में ढील देने और लागत को अनुमोदित करने के लिए यह प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया था जिसे मंजूरी मिल गई है।

मुजफ्फरनगर में केवीके की स्थापना के लिए दी जाएगी 12.419 हेक्टेयर भूमि
मुजफ्फरनगर में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए सिंचाई विभाग 12.419 हेक्टेयर भूमि देगा। संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में हरी झंडी दे दी गई है। यह भूमि मुजफ्फरनगर के ग्राम चित्तौड़ा और खतौली में स्थित है। पहले इस भूमि को सिंचाई विभाग ने पॉवर हाउस के निर्माण के लिए देने पर सहमति जता दी थी, लेकिन इस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ था। इसलिए सिंचाई विभाग और ऊर्जा विभाग, दोनों ने इसे केवीके को देने पर अपनी सहमति दे दी।

खुली निविदा से होगा भदोही एक्सपो मार्ट के संचालक का चयन

भदोही कॉर्पेट एक्सपो मार्ट के प्रबंधन एवं संचालन के लिए एजेंसी का चयन खुली निविदा से होगा। कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई। एक बार में 10 वर्ष के लिए एजेंसी का चयन किया जाएगा। 60 फीसदी दुकानों का आवंटन कार्पेट मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स को किया जाएगा।

राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि मैनेजमेंट ऑपरेशनल मॉडल के तहत कंपनी, फर्म, एसपीवी, ज्वाइंट वेंचर या सोसाइटी का चयन किया जाएगा। 10 वर्ष के बाद कार्पेट एक्सो मार्ट के प्रबंधन एवं संचालन के लिए दोबारा निविदा आमंत्रित की जाएगी। दोबारा निविदा में आई उच्चतम बोली को मैच करने का अधिकार प्रथम 10 वर्ष के संचालक को होगा। उस दर पर सहमत होने पर उसे पुर्नआवंटन में वरीयता दी जाएगी। आरएफक्यू (रिक्वेस्ट फॉर कोटेशन) और आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) प्रक्रिया के दौरान दो अनिवार्य प्री-बिड कॉन्फ्रेंस लखनऊ और भदोही में होगी। मार्ट में निर्मित स्थायी दुकानों का आवंटन सभी जिलों के कार्पेट निर्माण से संबंधित मैन्युफैक्चरर्स व एक्सपोर्टर्स को किया जा सकता है।

स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स को वरीयता दी जाएगी। दुकानों के आवंटन मद में या अन्य किसी भी प्रकार की जमा राशि एस्क्रो अकाउंट में जमा होगी। इसका संचालन गवर्निंग कमेटी और मैनेजिंग एंड ऑपरेटिंग एजेंसी संयुक्त रूप से करेंगी। ब्याज की राशि मैनेजिंग एंड ऑपरेटिंग एजेंसी के खाते में हर तिमाही जमा होगी। दुकान आवंटन मद में या अन्य किसी प्रकार की जमानत राशि की वापसी के लिए गवर्निंग कमेटी को दो माह पूर्व सूचना देनी होगी। इसके लिए सभी आवेदन मैनेजिंग एंड ऑपरेटिंग एजेंसी को दिए जाएंगे। गवर्निंग कमेटी की अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद राशि वापस होगी।

15 वर्ष के अध्यापन के अनुभव पर ही बन सकेंगे प्राचार्य

अब उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 15 वर्षों का अध्यापन, शोध या प्रशासन का अनुभव हासिल करने वाले भी अशासकीय स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में प्राचार्य बन सकेंगे। कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 में प्राचार्य पद के लिए जो मानदंड निर्धारित किए गए थे, उसके अनुसार उच्च शिक्षा से जुड़े विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य संस्थानों में 15 वर्ष तक सह आचार्य (उपाचार्य) या आचार्य रहने वाले ही प्राचार्य पद के लिए आवेदन कर सकते थे।

गैर अनुदानित और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की संख्या ज्यादा होने के कारण इस मापदंड के अनुरूप प्राचार्य नहीं मिल पा रहे थे। प्राचार्य की तैनाती न होने के कारण राज्य विश्वविद्यालय इन महाविद्यालयों की संबद्धता को बनाए रखने पर आपत्ति लगा रहे थे। इसलिए गैर अनुदानित और स्ववित्त पोषित अशासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य की अर्हता शर्तों में बदलाव किया गया है।

प्रदेश सरकार ने ऐसा उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 की धारा 50 की उपधारा 6 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया है। स्नातकोत्तर में न्यूनतम 55 फीसदी अंक और पीएचडी की अर्हता पहले की तरह ही बरकरार रहेगी।

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