विदाई समारोह में CJI मिश्रा का बड़ा बयान, कहा- जस्टिस गोगोई कायम रखेंगे कोर्ट की स्वतंत्रता

भारतीय न्यायपालिका दुनिया की सबसे मजबूत संस्था है। ये हमले और बुरे वक्त में भी मजबूती से खड़ी रहती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां के न्यायाधीश हमेशा कानून को सही परिपेक्ष्य में पेश करते हैं और न्यायिक परंपरा को कायम रखते हैं। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम है और हमेशा रहेगा। आने वाले नये मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के हाथ में न्यायपालिका की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहेगी।विदाई समारोह में CJI मिश्रा का बड़ा बयान, कहा- जस्टिस गोगोई कायम रखेंगे कोर्ट की स्वतंत्रता

जस्टिस मिश्रा 2 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत हो जाएंगे और 3 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेगें। 

भारत की न्यायपालिका सबसे मजबूत
जस्टिस मिश्रा ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता मजबूती के साथ कायम है और इसे किसी तरह की बनावटी चीजें खत्म नहीं कर सकतीं। हमारी न्यायपालिका दुनिया की सबसे मजबूत संस्था है, यहां के न्यायाधीश इतने बड़े मुकदमों के ढेर को निपटाने की क्षमता रखते हैं, वे लगातार समुद्र में बूंद के समान काम करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास दयावान या निर्दयी हो सकता है। वह किसी को उसके इतिहास से नहीं जांचते बल्कि उसकी गतिविधियों और धारणा के आधार पर जांचते हैं। न्याय, मानवीय संवेदनाओं का होना चाहिए। गरीब और अमीर के आंसू समान होते हैं।

नागरिक स्वतंत्रता के लिए याद किए जाएंगे जस्टिस मिश्रा
जस्टिस गोगोई ने जस्टिस मिश्रा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें नागरिक स्वतंत्रता के फैसलों के लिए याद किया जाएगा। इस संदर्भ मे उन्होंने जस्टिस मिश्रा के कई ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका प्रतिबद्ध होकर काम करती है। कम वेतन के बावजूद यहां निष्ठावान और प्रतिबद्ध न्यायाधीश हैं। हम क्या पहने क्या खाएं ये सब ऐसे मुद्दें है जो हमें आपस में बांटते हैं सिर्फ संवैधानिक नैतिकता है जो हमें बांधे रखती है।

बढ़नी चाहिए न्यायधीशों की सैलरी और रिटायरमेंट की उम्र
इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस मिश्रा निसंदेह निष्ठा और अच्छे चरित्र के व्यक्ति हैं। लोगों को अटकलों के आधार पर न्यायाधीशों पर आक्षेप नहीं लगाने चाहिए। ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने न्यायाधीशों की सेवानिवृति की आयु 65 वर्ष से बढ़ाए जाने की बात की साथ ही कहा कि न्यायाधीशों को जीवन भर पूरा वेतन मिलना चाहिए ताकि वे सेवानिवृति के बाद भी सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वे इस धारणा से सहमत नहीं हैं कि न्यायाधीश को सेवानिवृति के बाद कोई पद नहीं ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतना ज्ञान और अनुभव बेकार नहीं जाना चाहिए। अगर न्यायाधीश सेवानिवृति के बाद पद नहीं लेंगे तो ट्रिब्यूनल को कौन हेड करेगा। वेणुगोपाल ने न्यायाधीशों का वेतन चार – पांच गुना बढ़ाने की बात कही।

Back to top button