भूख मिटाने के लिए गर्भवती महिला को खेत में गई आलू बीनने, और वहीँ बच्चे ने लिया जन्म

हाथरस के गांव सुल्तानपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। एक गर्भवती महिला को भूख मिटाने के लिए दूसरे के खेत में आलू बीनने पड़े। गर्भवती महिला कई दिनों से अपनी भूख मिटाने के लिए ऐसे करने को मजबूर थी और हालत यहां तक आ गए कि भूख मिटाने की इस जद्दोजहद में ही वो बेहोश होकर खेत में ही गिर पड़ी। एक दिन अचानक प्रसव पीड़ा होने से वह बेहोश होकर गिर गई। ग्रामीणों ने उसकी हालत को देखते हुए आशा कार्यकर्ता को मौके पर बुला लिया। 

 

भूख मिटाने के लिए गर्भवती महिला को खेत में गई आलू बीनने, और वहीँ बच्चे ने लिया जन्म108 एंबुलेंस की मदद से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। जहां उसने एक बेटे को जन्म दिया। फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद थाना क्षेत्र की निवासी यह महिला सादाबाद क्षेत्र निवासी पति से विवाद होने पर घर छोड़कर चली आई थी। सीएचसी में काफी देर तक तो महिला ने लोगों को अपने बारे में कुछ नहीं बताया। बहुत जोर डालने पर उसने अपना नाम-पता इन लोगों को बताया।

महिला ने अपना नाम मीना पत्नी भूरी सिंह बताया है। वह फिरोजाबाद जिले की कोतवाली शिकोहाबाद के पास गांव नगला जाट की निवासी है। दो दिन पूर्व उसका किसी बात को लेकर अपने पति से झगड़ा हुआ था। इसी बात को लेकर वह घर से चली आई। उसने पिता का नाम पप्पू, मां का नाम गुड्डी, ताऊ का नाम बाबू एवं चाचा का नाम राजकुमार बताया। उसने बताया कि उसके पति कुल्हड़ बनाने का काम करते हैं। 

महिला भूख मिटाने के लिए खेतों में से आलू बीन रही थी। वह गर्भवती थी, इसलिए अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने से वह वहीं बेहोश होकर गिर गई। सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रकाश मोहन ने इस महिला के बारे में कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी है। महिला की सादाबाद क्षेत्र के बेलौठ गांव में ससुराल है। वो पति से लड़कर घर से चली आई है। महिला के परिजनों को सूचना दे दी गई है। महिला का मायका शिकोहाबाद के गांव नगला जाट में है।

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