कोरोना से बचने के लिए हो जाए सावधान, ये तीन वैरिएंट हैं सबसे खतरनाक…

अभी कोरोना की दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है। इसके दैनिक मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 45 हजार से अधिक नए मामले सामने आए हैं। लेकिन इस बीच कोरोना के मिल रह अलग-अलग वैरिएंट ने चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। इस वजह से माना जा रहा है कि देश में जल्द ही कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी। खबर है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार कोरोना का कप्पा वैरिएंट मिला है। यह कोरोना के बी.1.617 वंश के म्यूटेशन से पैदा हुआ है, जो डेल्टा वैरिएंट के लिए भी जिम्मेदार है। दरअसल, कोरोना के बी.1.617.2 वैरिएंट को डेल्टा वैरिएंट के नाम से जाना जाता है, जबकि बी.1.617.1 को कप्पा वैरिएंट कहा जाता है। कुछ महीने पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ यानी घातक घोषित किया है। आइए जानते हैं कोरोना के अन्य वैरिएंट और उनके लक्षणों के बारे में… 

डेल्टा वैरिएंट कितना खतरनाक? 
दरअसल, डेल्टा वैरिएंट को ही भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार माना जाता है। वही डेल्टा प्लस को लेकर भी अलग चिंता है। देश के कई राज्यों में इसके मामले सामने आ चुके हैं। दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल की डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, ‘कोरोना वायरस कोमोरबिडिटी वाले लोगों में ज्यादा असर करता है और उनमें मृत्यु दर भी ज्यादा होती है। ऐसे में डेल्टा प्लस वैरिएंट में भी माना जा रहा है कि यह ऐसे लोगों को ज्यादा प्रभावित कर सकता है। हालांकि अन्य लोगों को भी डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण का खतरा उतना ही है। इसलिए सभी को काफी सतर्कता बरतनी है।’ 

क्या है कोरोना का B.1.1.28.2 वैरिएंट?  
अभी पिछले महीने ही पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) ने जिनोम सीक्वेंसिंग के जरिये कोरोना के एक नए वैरिएंट का पता लगाया था, जिसे B.1.1.28.2 नाम दिया गया है। यह नया वैरिएंट ब्रिटेन और ब्राजील से भारत आए लोगों में पाया गया था। इससे संबंधित अध्ययन को ऑनलाइन पत्रिका बायोरिक्सिव (bioRxiv) में प्रकाशित भी किया गया था। अध्ययन में कहा गया कि यह वैरिएंट लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। इससे संक्रमित मरीजों में गंभीर लक्षण दिख सकते हैं। अचानक से वजन कम होना इसका प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा यह फेफड़ों में घाव भी कर देता है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाता है। 

B.1.1.28.2 वैरिएंट पर वैक्सीन असरदार है या नहीं? 
एनआईवी के अध्ययन के मुताबिक, स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन कोरोना के B.1.1.28.2 वैरिएंट पर भी असरदार है। वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद शरीर में जो एंटीबॉडीज बनती हैं, उससे इस नए वैरिएंट को निष्क्रिय किया जा सकता है।   

कोरोना के किसी भी वैरिएंट से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके 
विशेषज्ञ कहते हैं कि डेल्टा से लेकर कप्पा या B.1.1.28.2, चाहे कोरोना का कोई भी वैरिएंट हो, उससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि मास्क लगाएं, सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाए रखें और वैक्सीन जरूर लगवाएं। वैक्सीन लगवाने से संक्रमण की गंभीरता को कम किया जा सकता है।  
स्रोत और संदर्भ: 

  1. Tracking SARS-CoV-2 variants 
    https://www.who.int/en/activities/tracking-SARS-CoV-2-variants/
  2. Isolation of SARS-CoV-2 B.1.1.28.2 P2 variant and pathogenicity comparison with D614G variant in hamster model 
    https://www.biorxiv.org/content/10.1101/2021.05.24.445424v1 

अस्वीकरण नोट: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट की रिपोर्ट, ऑनलाइन पत्रिका बायोरिक्सिव (bioRxiv) में प्रकाशित स्टडी और डॉ. राजन गांधी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में  डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।

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