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कारोबार के क्षेत्र में पंजाब हुआ पीछे, सुखबीर ने कहा…

चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कारोबार के क्षेत्र में पंजाब के पिछड़ने पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि बिहार और झारखंड जैसे सूबे भी हमारे सूबे से आगे निकल गए हैं। पिछले डेढ़ साल में कांग्रेस सरकार की औद्योगिक नीति के कारण पंजाब की हालात दिन प्रति बुरी होती जा रही है।कारोबार के क्षेत्र में पंजाब हुआ पीछे, सुखबीर ने कहा...

उन्होंने कैप्टन को को चुनौती देते हुए कहा, ‘आपको सत्ता संभाले डेढ़ साल हो चुका है, इसलिए अब काम करके दिखाओ या कुर्सी छोड़ दो।’ वल्र्ड बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते सुखबीर ने कहा कि कितनी शर्म की बात है कि पंजाब पहले नंबर से खिसक कर 20वें नंबर पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि कारोबार करने की सुविधा के बारे में विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में पंजाब को 20वें नंबर पर रखा गया है। उन्होंने अपनी पिछली सरकार की उपलब्धियां गिनवाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान 2015 में राज्य कारोबार के माहौल को लेकर पूरे देश में पहले स्थान पर था। 1इसके बाद वर्ष 2016 में भी सिंगल विंडो सुधार में भी पंजाब पहले नंबर पर था। सुखबीर ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार 2013 में नई नीति बना कर पंजाब को पहले स्थान पर ले आई थी, जबकि कैप्टन ने डेढ़ साल में ही इस को 20वें नंबर पर पहुंचा दिया है। इस से बुरा क्या हो सकता था?

पंजाबियों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार

बादल ने कहा कि कांग्रेस सरकार सूबे को तबाह करके पंजाबियों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में एक ही छत के नीचे मंजूरी देने वाला और निवेश को बढ़ाने वाला सिस्टम तैयार करने वाले इन्वेस्ट पंजाब को लगभग खत्म कर दिया है। सुधार कमीशन को खत्म कर दिया गया है। 12 हजार सेवा केंद्रों को बंद कर दिया गया है, जिन्होंने आम नागरिकों के लिए सेवाओं शुरू करके उनकी सरकारी दफ्तरों में चक्कर काटने की परेशानी खत्म कर दी थी। अब बहानों और आरोपों वाली राजनीति खत्म हो गई है।

सुखबीर ने कहा कि कांग्रेस ने पंजाब के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाई है। कितने दुख की बात है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की छोटी सोच ने पंजाब को विकास की पटरी से नीचे उतार दिया है। उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार के दौरान अधिक टैक्स रियायतों वाले सूबों से घिरा होने के बावजूद पंजाब में 45 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ था।

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