सेना राजनीतिक दबाव में नहीं, आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा: आर्मी चीफ

जम्मू कश्मीर में बदले हालात के बीच सेना प्रमुख बिपिन रावत ने आतंकी आॉपरेशन को लेकर बड़ा बयान दिया है. सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन से आतंकियों के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला. जम्मू कश्मीर में बीजेपी पीडीपी के साथ सरकार में थी. मंगलवार को अचानक बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ दिया. बीजेपी सरकार से अलग हुई और महबूबा मुफ्ती के हाथ से सत्ता चली गई. जम्मू कश्मीर में अब राज्यपाल शासन लग चुका है.

क्या बोले सेना प्रमुख रावत?

जारनीतिक दवाब को लेकर पूछे गए सवाल पर सेना प्रमुख ने कहा, ”ऑपरेशन पहले भी चल रहे थे फिर बीच में हमने सस्पेंशन ऑप ऑपरेशन का दौर देखा. हम चाहते थे कि वहां की जनता को रमजान के दौरान नमाज अदा करने में कोई दिक्कत ना हो. इस दौरान आतंकियों ने अपनी कार्रवाई जारी रखी. इसलिए हमने दोबारा ऑपरेशन शुरू कर दिया है, हम अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे. हमारी कार्रवाई जैसी पहली चल रही थी वैसे ही चलती रहेगी, राजनीतिक बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा. हमारे ऊपर किसी भी तरह का कोई राजनीतिक दबाव नहीं है, सेना के अपने नियम हैं हम उसी के तहत कार्रवाई करते रहेंगे.”

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घायल जवानों के इलाज के लिए काम रहे हैं- रावत

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा, ”हमारे सैनिक उत्तर और उत्तर पूर्व में तैनात हैं, जो आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं. इसी दौरान हमारे कई जवान शहीद हो जाते हैं. उससे ज्यादा जवान ऐसे हैं जो आतंकी हमलों में घायल हो जाते हैं. जब जवान घायल हो जाते हैं तो या उनका कोई अंग खो जाता है या फिर कोई किसी मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा है. इस तरह के जवानों को जो परेशानी होती है उसे जानने की हमने कोशिश की है. कई बार ऐसे जवानों को मनोवैज्ञानिक इलाज की जरूरत होती है, लेकिन उन्हें गलतफहमी हो जाती है इससे उन्हें पागल बताया जा रहा है. हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि मनोवैज्ञानिक इलाज इसलिए दिया जा रहा है क्यों आप एक सदमे से गुजरे हैं.”

 

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