क्या आप भी हैं नार्कोलेप्सी के शिकार, जानिए इसके लक्षणों के बारे में…

नार्कोलेप्सी नींद के लक्षण अचानक से हमें शिकार में लेते हैं। तब हमारी स्थिति ऐसी बन जाती है कि हमारा दिमाग हमें उसी जगह और उसी कंडीशन में सोने में मजबूर कर देता है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि, इस बीमारी के होने पर कभी-कभी व्यक्ति अधिक हंसकर या रोकर सोता है। यह पाया गया है कि, यह बीमारी अधिकतर 15 वर्ष की आयु से लेकर 25 वर्ष की आयु वाले लोगों को अपना शिकार बनाती है। यह एक ऐसी आयु है जहां व्यक्ति का स्वास्थ्य तंदुरुस्त रहता है तथा उसके अंदर एक स्फूर्ति बनी रहती है। 

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क्यों होती है यह बीमारी-

यह बीमारी हायपोक्रिटन हार्मोन की कमी से होती है। हम यह भी कर सकते हैं कि इस बीमारी में हमारा दिमाग सोने लगता है। क्योंकि, हाइपोक्रिटिन हमारे दिमाग को जगाए तथा तंदुरुस्त रखने का कार्य करता है। जब हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता, इस हार्मोन बनाने वाले सेल्स को बुरे ढंग से प्रभावित करती है तो हमें यह समस्या होती है।

नार्कोलेप्सी के लक्षण-

-जब सोते वक्त व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है तब, वह उठ जाता है। यह भी एक कारण है इस बीमारी का।

-ऐसे लोग जिनका वजन अधिक रहता है या फिर मोटापे के शिकार व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में अधिक आते हैं।

-आजकल युवाओं के बीच नशा करने की एक बुरी इच्छा जागृत हो चुकी है। ड्रग या एल्कोहल के सेवन से यह बीमारी हो सकती है। इसलिए युवाओं को चाहिए कि, वह नशे का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।

-सर पर गहरी चोट लग जाना या फिर किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी का घेर लेना। 

-पार्किंसन एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जिसके कारण नार्कोलेप्सी होने का खतरा बना रहता है।

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