हार के बाद EVM को ‘बलि का बकरा’ बनाती हैं पार्टियां: मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत

मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले राजनीतिक दलों को लेकर कड़ी टिप्पणी की हैं. उन्होंने तमाम आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘निश्चित रूप से इस व्यवस्था में शक करने की बिल्कुल गुंजाइश नहीं है.’ ओपी रावत ने कहा कि राजनीतिक दल अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़कर उसे ‘बली का बकरा’ बना रहे हैं, क्योंकि वह बोल नहीं सकती. हार के बाद EVM को 'बलि का बकरा' बनाती हैं पार्टियां: मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत

वहीं कई राजनीतिक दल देश में फिर से बैलेट पेपर के जरिये चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं. वहीं इस सवाल पर रावत ने कहा ‘बैलेट पेपर की ओर फिर वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता है. आने वाले चुनाव वीवीपेट वाली ईवीएम से ही होंगे.’ उन्होंने दावा किया कि भारत में मुक्त व निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया ने सारी दुनिया को प्रभावित किया है.रावत ने कहा, ‘यह काबिले तारीफ बात है कि इतनी बड़ी संख्या में वोटरों के बावजूद, चुनाव आयोग कुछ ही घंटों में परिणाम देने में सक्षम है.’

मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसके साथ ही कहा चुनावों में धन और ताकत के प्रयोग को समाप्त करने के लिए व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने लोगों से निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियों और गलत तौर-तरीकों को आयोग के मोबाइल ऐप के जरिये उजागर करने की अपील की है. उन्होंने गड़बड़ियां उजागर करने वालों की पहचान को सुरक्षित रखने का भी भरोसा दिया. 

हाल ही में आयोग द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किये गये मोबाइल एप के जरिये कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान गड़बड़ियों की 780 शिकायतें मिली थीं. रावत ने बताया कि वीडियो फॉर्मेट में इन शिकायतों की जांच की जा रही है. उन्होंने बताया ‘आयोग को वीडियो के जरिये ये शिकायतें भेजने वालों की पहचान उजागर न हो, इसके लिये हम हर संभव कदम उठाएंगे.’

कोलकाता में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए रावत ने कहा कि यह मोबाइल ऐप आम आदमी को चुनाव में गड़बड़ियों की आयोग से सबूत सहित शिकायत करने की शक्ति देता है. आयोग इस ऐप के जरिये मिली शिकायत के स्थान की भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने के बाद इन शिकायतों पर उपयुक्त कार्रवाई करेगा.  ओपी रावत ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में यह सुविधा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई थी, जिसे अब भविष्य में प्रत्येक चुनाव में अनिवार्य रूप से सुचारू रखा जाएगा. 

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