शिशुजन्म के बाद पत्नी से इतने दिनों के बाद बनाये संबंध, नहीं तो…

शिशु के जन्म के बाद पति-पत्नी के बीच यौन संबंध बनाने को लेकर बहुत सारी भ्रान्तियां होती हैं. वैसे तो यह पूरी तरह पति-पत्नी पर निर्भर करता है. लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.  आइए जानते हैं कि जन्म के कितने दिनों बाद और कैसे संबंध बनाना चाहिए…

संबंध बनाने से पहले शिशु के जन्म के बाद होने वाले रक्तस्त्राव (लोकिया) के समाप्त होने तक इंतजार करना चाहिए. शिशु के जन्म के करीब 3 से 6 सप्ताह तक यह रक्तस्त्राव बंद हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अपरा (प्लेसेंटा) के बाहर निकलने से गर्भाशय में हुए घाव अभी भी भर रहे होते हैं. रक्तस्त्राव बंद होने से पहले ही संभोग करने पर संक्रमण हो सकता है.

शुरुआत में केवल आंलिंगन और अंतरंगता बनाने का प्रयास करें, ताकि धीरे-धीरे आपको दोबारा कामुक तरीके से छुए जाने की आदत होने लगे.

धीरे-धीरे और सहजता से शुरुआत करें. एक दूसरे के शरीर के साथ अंतरंगता बनाएं और यौन संबंध से पहले की कामुक क्रीड़ाओं का आनंद लें. हालांकि, यह उम्मीद न करें कि इसके बाद आप संबंध बनाएंगे.

अगर आप बेचैन या चिंतित हैं तो इससे आपको पीड़ा होगी, और आप कामोत्तेजित नहीं हो पाएंगी. ऐसे में यौन संबंध आपके लिए असहज होगा, क्योंकि आपकी योनि चिकनी या नरम नहीं होगी.

अगर, आपका पेरिनियम क्षेत्र संवेदनशील लग रहा है, तो ल्युब्रिकेन्ट लगा सकती हैं. इससे आपके लिए यौन संबंध बनाना काफी सहज हो जाएगा. अगर, आप कॉन्डम का इस्तेमाल करती हैं, तो तेल आधारित चिकनाई का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे कॉन्डम से रिसाव होने का खतरा रहता है. स्तनपान करवाने के दौरान योनि का सूखा रहना काफी आम है, ऐसे में ल्युब्रिकेन्ट लगाने से आपको मदद मिल सकती है.

जब आप यौन संबंध बनाने के लिए तैयार महसूस करें, तो भी जल्दबाजी न करें. यह आप दोनों को एकदम स्वाभाविक लगना चाहिए और आप दोनों इसके लिए तैयार और पूरी तरह उत्तेजित होने चाहिए. ऐसी अवस्था अपनाएं, जिसमें आपकी संवेदनशील जगहों पर दबाव न पड़े. आप स्वयं पति के ऊपर होने की अवस्था में मनमुताबिक संबंध बना सकती हैं.

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अगर, आप संवेदनशील या असहज महसूस करें, तो अपने पति को कुछ देर रुकने के लिए कहें. इसके बजाय वे आपके क्लिटोरिस को कोमलता से छू सकते हैं. आप जब उत्तेजित महसूस करने लगें, तो दोबारा से संभोग शुरु कर सकती हैं.

अगर थकान आपके लिए संभोग में बाधा बन रही हो, तो शिशु के सोने के समय आप संभोग का प्रयास कर सकती हैं. इस समय आप इतनी थकी हुई नहीं होंगी और संभोग का आनंद ले सकेंगी. मुमकिन है कि बहुतों की तरह आप भी यह पाएं कि संभोग के समय ही आपका शिशु जाग जाता है. मगर इसे हंस कर टालने का प्रयास करें और अगले मौके का इंतजार करें. धैर्य रखें, शिशु जब रातभर सोने लगेगा, तो सब आसान लगने लगेगा.

 

श्रोणि मांसपेशियों के व्यायाम करना जारी रखें, इससे आपकी योनि की मांसपेशियों की मजबूती लौटने में मदद मिलेगी. यह आपके संभोग के अनुभव को अधिक आनंददायक बनाने में मदद करेगा.

पौष्टिक आहार का सेवन करें, पर्याप्त तरल पदार्थ लें और जब भी संभव हो, आराम करें. शिशु की देखभाल करना अत्याधिक मेहनत का काम है. बची हुई ऊर्जा में आपको अपनी भी देखभाल करनी होती है.

संबंध बनाने के दौरान अगर पीड़ा हो रही हो या किसी और प्रकार की समस्या हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

 
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