काम की बात: सरकार का बड़ा फैसला, परीक्षाओं में आधार कार्ड अनिवार्य

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की परीक्षाओं में 2019 से आधार कार्ड अनिवार्य होगा। छात्रों का रजिस्ट्रेशन के समय ही आधार नंबर लिंक कर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया से सही छात्रों की पहचान करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
वर्ष 2018 की परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुका है, पर परीक्षा फॉर्म भरने के वक्त छात्रों को आधार कार्ड बना लेना होगा। अगर आधार कार्ड नहीं है तब एक वैकल्पिक पहचान पत्र जरूर परीक्षा फॉर्म भरते समय देना होगा। बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव के बाद गुरुवार की शाम संवाददाता सम्मेलन में इसकी घोषणा की।
स्टेट और जिला स्तर पर सम्मानित होंगे टॉपर
बिहार बोर्ड की ओर से फैसला लिया गया है कि अगले साल से स्टेट के साथ-साथ जिला के टॉपरों को भी सम्मानित किया जाएगा। दोनों की मेधा सूची तैयार की जाएगी। मैट्रिक और इंटर की जिलाबार परीक्षा की रिपोर्ट सरकार के पास भेजी जाएगी। इसके अलावा विषयवार विश्लेषण के साथ पूरी रिपोर्ट उपलब्ध करायी जाएगी। इसकी एक-एक कॉपी जिलों में भेजी जाएगी। ताकि सभी जिले अपने रिजल्ट का विश्लेषण कर सकें। सरकार मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट के आधार पर सभी जिलों के पढ़ाई में सुधार का फ्रेमवर्क तैयार करने का टास्क देगी।
कई प्रक्रियाएं हो चुकी हैं ऑनलाइन
अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा कि वर्ष 2019 तक बोर्ड में पेपरलेश वर्क का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बिहार बोर्ड में बहुत प्रक्रियाएं अभी ऑनलाइन हो चुकी हैं। बची हुई प्रक्रियाओं पर काफी तेजी से कार्य हो रहा है।
परीक्षा में सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तैयार होगा रोडमैप
बिहार बोर्ड की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात हुई। इसमें तय हुआ राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सुधार के लिए एक रोडमैप तैयार करना होगा। इसके लिए कई स्तर पर बोर्डों के साथ बैठक होगी। जिसमें यह चर्चा होगी कि दूसरे बोर्डों में किन-किन प्रक्रियाओं में परेशानी होती है, इनमेंं कैसे सुधार किया जाए और पारदर्शी बनाया जाए ताकि छात्रों को कम से कम परेशानी हो।
आने वाले समय में आईटी पर आधारित होगी परीक्षा
राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव में कई बातें उभरकर सामने आईं। इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह आई कि आने वाले समय में सभी बोर्डों को कंप्यूटरीकृत परीक्षाओं की रणनीति तैयार करनी होगी। जिस तरह से परीक्षाओं पर सवाल उठ रहे हैं। परीक्षाओं के पेपर वायरल कर दिए जा रहे हैं, इसे इग्नोर नहीं किया जा सकता है। चाहे पेपर असली हो नकली। कुछ समय के लिए छात्र दिगभ्रमित हो जाते हैं।
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हर साल होगा बोर्डों का कॉन्क्लेव
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा सभी बोर्डों का कॉन्क्लेव कराने की सराहना की गयी। साथ ही बिहार बोर्ड की पहल पर आगे दूसरे बोर्डों ने भी इस तरह का कॉन्क्लेव कराने का फैसला किया। वर्ष 2018 में गुजरात और वर्ष 2019 में उड़ीसा ने कॉन्क्लेव कराने का फैसला किया गया। इसकी जानकारी बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने दी।
बिहार बोर्ड के हर फैसले में सरकार करेगी मदद : शिक्षामंत्री
शिक्षामंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में कहा कि बिहार बोर्ड ने एक अच्छी पहल की है। सभी बोर्डों के प्रतिनिधियों को बुलाकर वहां की कार्यशैली और परीक्षा पद्धति के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसी के अनुरूप सुधार कर एक नई शुरुआत होगी। सरकार की ओर से बिहार बोर्ड को बेहतर बनाने में हरसंभव मदद की जाएगी। वहीं शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने कहा कि बोर्ड की ओर से बेहतर कार्य किया जा रहा है। परीक्षा पद्धति को जितना पारदर्शी बनाया जाएग उतना बेहतर होगा।
उन्होंने कहा परीक्षा पद्धति में जितनी तकनीकों का प्रयोग होगा, बेहतर रिजल्ट होगा। कॉन्क्लेव में 15 राज्यों के बोर्डों के अध्यक्ष, सचिव और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें उड़ीसा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश, वेस्ट बंगाल, जम्मू एंड कश्मीर, केरल, हरियाणा, असम बोर्ड के अलावा सीबीएसई सहित कई बोर्डों के प्रतिनिधि शामिल हुए।





