आम आदमी पार्टी में एक बार फिर उथल-पुथल आई सामने, राजस्थान से की कुमार विश्वास की छुट्टी

आम आदमी पार्टी में एक बार फिर उथल-पुथल सामने आई है. पिछले काफी समय से पार्टी में साइडलाइन किए जा रहे कवि और नेता कुमार विश्वास से अब राजस्थान के प्रभारी का पद वापस ले लिया गया है. आम आदमी पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) ने विश्वास को हटाकर दीपक वाजपेयी को राजस्थान का नया प्रभारी बनाया है.

आपको बता दें कि कुमार विश्वास भी आप की PAC का हिस्सा हैं. गौरतलब है कि इसी साल के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव हैं. उम्मीद की जा रही है कि आम आदमी पार्टी राज्य में चुनाव लड़ेगी. सूत्रों की मानें तो जब से कुमार विश्वास को राजस्थान प्रभारी का पद दिया गया था, तभी से उन्हें किसी भी PAC बैठक में नहीं बुलाया गया था. हाल ही में जो ये PAC की बैठक बुलाई गई थी, उसमें भी उन्हें नहीं बुलाया गया था.

इस फैसले के बाद कुमार विश्वास ने ट्वीट भी किया. उन्होंने कुछ पंक्तियां ट्वीट की. कुमार ने लिखा कि कुछ सफल हुए “निर्वीय” तुम्हें यह राजनीति समझाने में, इन “आत्मप्रवंचित बौनों” का, दरबार बना कर क्या पाया?”.

राज्यसभा चुनाव से शुरू हुई जंग

गौरतलब है कि दिल्ली में राज्यसभा चुनावों के बाद से ही कुमार विश्वास के निशाने पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व रहा है. पार्टी ने कुमार विश्वास को राज्यसभा का टिकट नहीं दिया था. बल्कि संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और सुशील गुप्ता राज्यसभा भेजा गया. इसमें एनडी गुप्ता और सुशील गुप्ता को लेकर काफी विवाद हुआ था.

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मारेंगे पर शहीद नहीं होने देंगे! 

कुमार विश्वास ने इसके बाद खुलकर पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा था. कुमार विश्वास ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा था कि युद्ध का एक नियम होता है, शहीदों के शव से छेड़छाड़ नहीं की जाती है. आपकी (अरविंद केजरीवाल) इच्छा के बिना वहां पर कुछ होता नहीं है, आपसे असहमत रहकर दल में जीवित रहना काफी मुश्किल है. साथ ही विश्वास बोले कि अरविंद ने कहा था मारेंगे पर शहीद नहीं होने देंगे.

माफी को लेकर भी हुआ था दंगल

हाल ही में अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं ने मानहानि मामलों में माफी मांगी. लेकिन कुमार विश्वास ने इस बात का खुले तौर पर विरोध किया था. जिसके बाद कुमार विश्वास ने कहा था कि वह माफी नहीं मांगेंगे और अकेले ही केस लड़ेंगे. 

गौरतलब है कि ना सिर्फ राज्यसभा चुनाव बल्कि कई अन्य मामलों में भी कुमार विश्वास को लेकर पार्टी में विरोधाभास की स्थिति बनी थी. विश्वास और केजरीवाल के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग राय देखने को मिली थी. चाहे वो मामला कपिल मिश्रा का हो या अमानतुल्लाह खान का.

 
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