दीक्षा की एक जिद ने दो घरों के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया

दीक्षा की कार चलाने की जिद ने दो घरों के चिराग को बुझा दिया। दरअसल हादसे से महज तीन मिनट पहले ही दीक्षा ने रितेश से कार चलाने की जिद कर स्टीयरिंग थामा था। ड्राइविंग सीट पर बैठते ही दीक्षा ने कार को पूरी रफ्तार दे दी।
इसके बाद सड़क पर कार के पहियों की आवाजें आने लगीं और अनियंत्रित कार डिवाइडर में घुसकर खंभे से जा टकराई। एक तेज धमाका हुआ और कार के परखच्चे उड़ गए। दीक्षा के पास से पुलिस को लर्निंग लाइसेंस मिला है। उसकी अवधि भी खत्म हो चुकी है।

दीक्षा की एक जिद ने दो घरों के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दियाचश्मदीद अक्षय अरोड़ा की मानें तो हादसे के समय कार की रफ्तार करीब सौ से ऊपर थी। टक्कर लगने के बाद कार के पलटते ही एक लड़की कार से बाहर आकर गिरी। वहीं अन्य लोग कार में फंस गए। अक्षय ने बताया कि हादसे के समय कार में मौजूद कोई भी होश हवास में नहीं था। उसने तुरंत घटना की जानकारी पुलिस को दी।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि शनिवार को एमिटी में फेस्ट था। वहां से सभी रात करीब साढ़े दस बजे घूमने के लिए निकले। सभी का पार्टी करने के लिए मुरथल जाने का प्रोग्राम था।

नोएडा से सभी रितेश की कार से कनॉट प्लेस पहुंचे, जहां एक दुकान से उन लोगों ने चिप्स व ग्लास लिए। वहां से सभी इधर-उधर घूमते रहे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान सभी ने कार में शराब पी।

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो विजय नगर से किंग्सवे कैंप की ओर आते समय रितेश ने कार रोकी और कुछ सामान खरीदने एक दुकान में गया। इसी दौरान दीक्षा पीछे की सीट से ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गई। उसके बगल वाली सीट पर राशि बैठी थी। रितेश कार के पास पहुंचा। दीक्षा कार चलाने की जिद करने लगी।

नहीं मानने पर रितेश पिछली सीट पर बैठ गया। दीक्षा स्टीयरिंग पर बैठी और कार की रफ्तार बढ़ा दी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो सुनसान सड़क पर स्किड करने की वजह से कार के पहिए की आवाजें आने लगीं और डिवाइडर से टकराने पर जोरदार धमाका हुआ और कार के परखच्चे उड़ गए।

हादसे के बाद सभी छात्रों के परिवार सदमे में हैं। खासकर हादसे में मारे गए सिद्धार्थ व रितेश के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। पीतमपुरा में रहने वाले सिद्धार्थ के परिवार वाले शव पीतमपुरा स्थित घर नहीं ले गए।

उन्हें सिर्फ यह पता है कि सिद्धार्थ की सड़क हादसे में मौत हो गई है लेकिन किसी ने शव को घर पर आते नहीं देखा। यहां तक कि पोस्टमार्टम के दौरान परिवार वालों ने मीडिया से बात करने से मना कर दिया। वहीं प्रशांत विहार में रहने वाली दीक्षा के घर पर कोई नहीं था।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि दीक्षा के पिता कारोबारी हैं। वहीं राशि के पिता मेरठ में ज्योतिष हैं। जबकि जोशिता के पिता मुंबई में एक तेल कंपनी में कार्यरत हैं। सिद्धार्थ के पिता नोएडा स्थित एक निजी चैनल में कार्यरत हैं।

वहीं रितेश के पिता सोनीपत में बुटीक चलाते हैं। पुलिस के मुताबिक सिद्धार्थ की दीक्षा से दोस्ती थी। इसके जरिये ही सभी आपस में दोस्त बने थे।

दीक्षा अपने परिजनों के साथ प्रशांत विहार इलाके में रहती है। उनके पड़ोस में रहने वालों ने बताया कि दीक्षा के परिजन किसी काम से दिल्ली से बाहर गए हैं। मीडिया के घर पहुंचने पर उनलोगों को घटना की जानकारी मिली। उसके बाद उन लोगों ने दीक्षा के परिजनों को इस बात की जानकारी दी।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि सिद्धार्थ और रितेश के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों के सिर में गंभीर चोट लगी थी। जिसकी वजह से उनकी मौत हुई है। पुलिस को आशंका है कि दोनों दरवाजे की तरफ बैठे होंगे और तेज रफ्तार कार के टकराने से उनके सिर में चोट लगी होगी। अंदरूनी चोट लगने की वजह से उनकी मौत हुई है।

हादसे के बाद चौकी में मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंच गए। उसके बाद पुलिसकर्मियों ने अन्य लोगों की मदद से कार को सीधा किया और उसमें फंसे लोगों को बाहर निकालकर पास के अस्पताल में भर्ती कराया।

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