शराब बंदी होने पर भी सबसे ज्यादा बिक्री, पिछले साल का रिकार्ड तोड़ा शराबियों ने

नागपुर.हाइवे से 500 मीटर के दायरे में आने वाली शराब की दुकानें बंद होने के बावजूद जिले में शराब बिक्री पर कोई असर नहीं हुआ है। शराब बंदी के बाद जिले में शराब की बिक्री आैर बढ़ गई है। शराब उत्पादन पर नागपुर जिले को पिछले चार महीने में 1 अरब 90 करोड़ 59 लाख 22 हजार 227 रुपए की शराब बिकी है। यह अप्रैल से जुलाई तक के आंकड़े हैं। शराबियों ने पिछले साल के शराब बिक्री के रिकार्ड को तोड़ दिया है। शराब बिक्री का ग्राफ हर महीने बढ़ते ही जा रहा है। हालात जो भी हो जिले में शराब की बिक्री बढ़ते ही जा रही है।
शराब बंदी होने पर भी सबसे ज्यादा बिक्री, पिछले साल का रिकार्ड तोड़ा शराबियों ने
जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग के राजस्व में दिन-ब-दिन बढ़ोतरी हो रही है। आबकारी विभाग के रिकार्ड पर नजर डालें तो अप्रैल 2016 से जुलाई 2016 इन चार महीने में जिले को देशी, अंग्रेजी व बीयर से 1 अरब 29 करोड़ 47 लाख 73 हजार 541 रुपए का राजस्व मिला था।

ये भी पढ़े: बड़ी खबर: चाइना के सभी मोबाइलों पर पीएम मोदी ने लगाई रोक, अब नहीं बिकेगा भारत में एक भी चाइनीज फोन

 वहीं इस साल अप्रैल से जुलाई तक 1 अरब 90 करोड़ 59 लाख 22 हजार 227 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल 61 करोड़ 11 लाख 48 हजार 686 रुपए का ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ है। आबकारी विभाग के राजस्व में 47.20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 1 अप्रैल 2017 से हाइवे से 500 मीटर के दायरे में आने वाली शराब दुकानें जैसे बीयर बार, वाइन शॉप व देशी शराब दुकानें बंद हुई हैं।

 
नागपुर जिले में भी बड़े पैमाने पर शराब दुकानें बंद हुई हैं। शराब बंदी के बाद ऐसा माना जा रहा था कि शराब बिक्री पर इसका असर होगा आैर सरकारी राजस्व में कमी आएगी। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। शराब का उत्पादन बढ़ने के साथ ही राजस्व भी बढ़ता ही जा रहा है।
बिक्री पर नहीं, उत्पादन पर लगता है टैक्स
सरकार शराब पर जो टैक्स लगाती है, वहीं आबकारी विभाग का राजस्व होता है। सरकार शराब बिक्री पर टैक्स नहीं लगाती। शराब उत्पादन पर टैक्स लगाती है। यानी शराब जिस फैक्टरी में बनकर बाहर निकलती है, वहीं उस पर टैक्स लग जाता है। फैक्टरी से शराब जिस जिले में जाएगी, राजस्व उस जिले को मिलता है। शराबी जितने ज्यादा होंगे, उतनी शराब की मांग ज्यादा होती है आैर फैक्टरी से संबंधित जिले में शराब भेजी जाती है।
 
शराब पर 60 फीसदी तक टैक्स
शराब जितनी महंगी मिलती है, वास्तव में उतनी महंगी होती नहीं है। शराब पर करीब 60 फीसदी तक टैक्स लगाया जाता है। मोटे तौर पर देखे तो 100 रुपए की शराब की असल कीमत 40 रुपए होती है। इसके अलावा शराब दुकानदार अपने स्तर पर भी 10 रुपए ज्यादा लगाते हैं। एमअारपी से ज्यादा राशि लेने पर किसी ने आपत्ति जताई तो उसे परमिट लेकर आने को कहते हैं। एमआरपी से 10 रुपए ज्यादा लेने वाले दुकानदारों पर आबकारी विभाग ठोस कार्रवाई करता दिखाई नहीं देता। आबकारी अधिकारियों की मिलिभगत के आरोप भी लगते रहते हैं। 500 मीटर का आदेश लागू होने के बाद से शहरों के बीच में चलने वाली दुकानें चांदी काट रही हैं।
 
बढ़ती जा रही है मांग
आबकारी विभाग नागपुर के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हाइवे से 500 मीटर के दायरे में आने वाली दुकानें बंद होने के बावजूद शराब बिक्री में कमी नहीं आई है। विभाग शराब के उत्पादन पर टैक्स लगाता है, बिक्री पर नहीं। शराब का उत्पादन बढ़ता जा रहा है। सरकारी राजस्व में वृद्धि हो रही है। हर साल राजस्व का टारगेट बढ़ा कर मिलता है आैर विभाग उसे पूरा करने की कोशिश करते रहता है।
 
4 महीने का लेखा-जोखा
2016-17 1 अरब 29 करोड़ 47 लाख 73 हजार 541 रुपए 
2017-18 1 अरब 90 करोड़ 59 लाख 22 हजार 227 रुपए
61 करोड़ 11 लाख 48 हजार 686 रुपए की राजस्व वृद्धि
Back to top button