सीएम गुप्ता का बड़ा ऐलान- दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में लागू होगा ‘हीट स्मार्ट’ मॉडल

 दिल्ली में भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) के असर से बच्चों को बचाने के मकसद से बुधवार को शालीमार बाग के BT ब्लॉक स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में ‘हीट स्मार्ट स्कूल’ पायलट प्रोजेक्ट का हाई-लेवल दौरा किया गया। CMO से जारी एक बयान के अनुसार, इस दौरे का आयोजन संयुक्त रूप से ज़िला प्रशासन (सेंट्रल-नॉर्थ ज़िला), नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) और GIZ इंडिया ने किया था। प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल में लागू किए गए कई व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर अपनाए जा सकने वाले उपायों का जायज़ा लिया, जिनका मकसद भीषण गर्मी के दौरान छात्रों के लिए सुरक्षित और जलवायु-अनुकूल सीखने का माहौल बनाना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘हीट स्मार्ट स्कूल’ पायलट से जुड़े सभी विभागों और सहयोगी संगठनों को बधाई दी और कहा कि बच्चों की सुरक्षा और भलाई दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के हालात को देखते हुए इस तरह की नई पहल समय की ज़रूरत है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस मॉडल को राजधानी के और भी स्कूलों में बढ़ाया जाएगा, जिससे सुरक्षित और जलवायु-अनुकूल सीखने का माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई जा सकेगी।

इस हाई-लेवल प्रतिनिधिमंडल में NDMA के सदस्य सचिव और विभागाध्यक्ष कृष्णा एस. वत्सा, सेंट्रल-नॉर्थ ज़िला मजिस्ट्रेट शैलेंद्र सिंह परिहार, जर्मनी दूतावास के आर्थिक सहयोग और विकास विभाग के दूसरे सचिव जोहान्स श्नाइडर, GIZ इंडिया की डायरेक्टर रचना अरोड़ा, GIZ इंडिया की प्रोजेक्ट मैनेजर मेघना क्षीरसागर, ADRA इंडिया के कंट्री डायरेक्टर संतोष श्रीकांत पट्टार, सर्वोदय बाल विद्यालय के प्रिंसिपल विक्रम यादव के साथ-साथ दिल्ली सरकार, GIZ इंडिया, ADRA इंडिया और अन्य सहयोगी संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

बयान के अनुसार, दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया और जलवायु-अनुकूल उपायों का जायज़ा लिया। इन उपायों में कूल रूफ़ (ठंडी छतें), छायादार कॉरिडोर और वेटिंग एरिया, पीने के पानी की बेहतर सुविधाएँ, छात्रों के नेतृत्व में जागरूकता अभियान, गर्मी से सुरक्षा की जानकारी देने वाले डिस्प्ले और बच्चों में गर्मी के तनाव को कम करने व सुरक्षित सीखने का माहौल बनाने के लिए डिज़ाइन की गई सहभागी शैक्षिक गतिविधियाँ शामिल थीं।

इस मौके पर ज़िला मजिस्ट्रेट शैलेंद्र सिंह परिहार ने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लागू किए जा रहे ‘दिल्ली हीट एक्शन प्लान’ का ही एक व्यावहारिक विस्तार है। उन्होंने कहा कि यह नीति को व्यावहारिक, स्कूल-स्तर के उपायों में बदलता है, जो जलवायु-अनुकूल शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देने के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि ज़िला प्रशासन तालमेल, स्थानीय इनोवेशन और असरदार तरीके से लागू करके समुदायों तक ऐसी पहल पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

NDMA के मेंबर सेक्रेटरी और डिपार्टमेंट हेड कृष्णा एस. वत्सा ने कहा कि हीटवेव आज भारत के सामने जलवायु से जुड़े सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले खतरों में से एक है। उन्होंने स्कूलों समेत पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में स्ट्रक्चरल सुधार, तैयारी के उपाय और व्यवहार से जुड़ी जागरूकता को शामिल करके जलवायु अनुकूलन को संस्थागत बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उनके अनुसार, ‘हीट स्मार्ट स्कूल’ न सिर्फ़ बच्चों को सीखने के लिए सुरक्षित माहौल देते हैं, बल्कि उन्हें अपने परिवारों और समुदायों में जलवायु अनुकूलन के एंबेसडर बनने के लिए भी प्रोत्साहित करते हैं।

भारत सरकार, दिल्ली सरकार, GIZ इंडिया, जर्मनी के दूतावास और ADRA इंडिया के बीच सहयोग की तारीफ़ करते हुए वत्सा ने कहा कि यह मॉडल सरल, सस्ता, बड़े पैमाने पर लागू करने लायक और दोहराने योग्य होना चाहिए ताकि देश भर के स्कूल इसे अपना सकें। InCRIS प्रोजेक्ट पॉलिसी एडवाइज़री, संस्थागत क्षमता निर्माण, डिजिटल निर्णय-सहायता सिस्टम, जलवायु जोखिम फाइनेंसिंग के इनोवेटिव समाधान और पायलट प्रदर्शन के ज़रिए इंटीग्रेटेड हीटवेव मैनेजमेंट में मदद करता है। इसका मकसद ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और कमज़ोर समुदायों की जलवायु के प्रति सहनशीलता को मज़बूत करना है।

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