सिर्फ घूमने का नाम नहीं हैं गर्मी की छुट्टियां! घर पर ही खेल-खेल में बच्चों को सिखाएं लाइफ स्किल्स

सलोनी इस बार बच्चों को किसी समर कैंप में भेजने से कतरा रही हैं। बढ़ती महंगाई और ऊपर से इतनी गर्मी में बच्चों को लेकर आना-जाना भी अपने आप में एक बड़ा काम है। ऐसे में, वो बच्चों को घर में ही रहकर कुछ जिम्मेदारियां साझा करने-सिखाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। बेटी की डीआइवाई क्लास जाने की योजना थी, तो उसे घर की ही चीजों से कुछ रचनात्मक के लिए प्रेरित कर रही हैं।
वहीं बेटे को घरेलू कामकाज और फाइनेंस सिखाने की प्लानिंग है। 20वीं शताब्दी के सातवें – आठवें दशक में जन्मे व्यक्ति गर्मी की छुट्टियों की बात करते हुए कितनी ही सुनहरी यादों में खो जाते हैं। तब छुट्टियां सिर्फ घूमने-फिरने का नाम नहीं थीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान से ओत-प्रोत थीं। इस दौरान बच्चों की अलग दिनचर्या व जिम्मेदारियां होती थीं। छत पर बिस्तर लगाना, मटके या फ्रिज में रखने के लिए बोतलों में पानी भरना, सुबह-शाम पौधों को पानी देना, घरेलू चीजों से क्राफ्ट बनाना, दोपहर में किताबें पढ़ना, सुबह और शाम को सैर पर जाना। बच्चे तो खान- पान की वस्तुएं घर में बनते देखकर और सहयोग करके खेल-खेल में ही सीख जाते थे।
आसान हो शुरुआत
इस बार बच्चों के लिए घर को ही लाइफ स्किल कैंप बनाएं। जहां वे घर की सुरक्षा और माता-पिता की निगरानी में जिंदगी की उपयोगी आदतें या कौशल सीख सकें। ये छोटे- छोटे अनुभव बच्चों को आत्मनिर्भर बनाते हैं, गलतियों से सीखने और उनसे उबरने की भी बखूबी ट्रेनिंग प्रदान करते हैं। आज 30 सेकेंड की रील से भी बोर होने वाली पीढ़ी को जीवन के जरूरी कौशल सिखाने के लिए सरल, रचनात्मक और प्रभावी ढंग से कुछ कदम अपनाए जा सकते हैं, जो उनके व्यक्तिगत, सामाजिक, घरेलू और फाइनेंस के कौशल को मजबूत करें।
परफेक्ट पेरेंटिंग
किसी भी गतिविधि को बच्चों पर थोपे नहीं। उनकी राय लेकर आवश्यकतानुसार संशोधन करें, जिससे बच्चों की रुचि बनी रहे ।
इन सब गतिविधियों के दौरान उनकी छोटी-छोटी जीत के रिकार्ड रखें और शाबाशी देना न भूलें।
ऐसे किसी भी प्रयास के लिए अभिभावक का रोल माडल होना जरूरी है। आप भी उनकी तरह आदतें अपनाएं।
पहली बार में परफेक्शन की उम्मीद न रखें। डांटने के बजाय समझाएं और सीखने पर जोर दें।
भविष्य बनेगा आज
सबसे पहले रोजमर्रा के घरेलू काम सीखने पर बल दें। रोज नियम से अपना बिस्तर ठीक करना, चीजों को जगह पर रखना और खाना बनाना सीखना सिर्फ कौशल नहीं, बल्कि आत्म निर्भरता की पहली सीढ़ी है। बच्चों को एक सप्ताह का मेन्यू बनाना सिखाएं, उसके अनुसार सामग्री / सब्जियों की लिस्ट बनवाएं, खरीदारी करने दें। अपने कपड़ों पर इस्त्री करना, बटन लगाना, सफेद और रंगीन कपड़े अलग-अलग धोना, सब्जी और फल काटना आदि जरूरी कौशल हैं। ध्यान रहे कि हर कौशल आपकी उचित निगरानी में हो और इसमें आयु का विशेष ध्यान रखें। अगर बच्चे बड़े हों तो गैस का सावधानी से उपयोग करना, आपातकाल में काम आने वाली फर्स्ट एड इत्यादि के बारे में सिखाएं।
जिम्मेदार बनें बच्चे
छुट्टियों के दौरान बच्चों को बजट और बैंकिंग जैसी वित्तीय शिक्षा दें। आनलाइन पेमेंट की वजह से बच्चे आजकल नगद भुगतान ज्यादा नहीं देखते, उन्हें बैंक, एटीएम और बचत खाते के बारे में बताएं। बच्चों को महीने का राशन लेने के दौरान साथ रखें और छोटी-छोटी खरीददारी के गुर बताएं। नेट बैंकिंग की सुविधा के साथ-साथ उसकी सुरक्षा से भी अवगत कराएं। वित्तीय ज्ञान उनमें समझदारी और जिम्मेदारी से निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। बच्चों को इंटरनेट सुरक्षा, कार्बन फुटप्रिंट्स और डिजिटल व्यवहार के गुर सिखाएं। बताएं कि इंटरनेट मीडिया पर सम्मानजनक व्यवहार कैसे रखें और अगर किसी असहज स्थिति में पड़ जाएं तो अभिभावक से तुरंत साझा करें।
अब बात समय की
बच्चों को समय का सही प्रबंधन करना जरूर सिखाएं। इसके लिए कोई टू डू लिस्ट या टाइम टेबल बनाना सिखाएं, जो व्यावहारिक रूप में फालो किया जा सके। घर में बच्चों को रचनात्मक और टीम वर्क सिखाने के लिए प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियों से जोड़ें। कोई किचन गार्डन प्रोजेक्ट, फैमिली एलबम बनाना, घर की पुस्तकों को लाइब्रेरी की तरह नंबरिंग कर उनका कैटलाग बनाना, इत्यादि सिखा सकते हैं। इसके अलावा आप बच्चों को पेंटिंग, बेकिंग, वाहन की सामान्य देखरेख और क्राफ्ट भी घर पर ही सिखा सकते हैं।





