6 संकेत दिखने पर समझ जाएं आपके बच्चे को चाहिए होम ट्यूटर

हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करे और खुशी-खुशी स्कूल जाए, लेकिन कई बार स्कूल की भागदौड़ और भारी सिलेबस के बीच बच्चा कहीं खो सा जाता है। क्लास में 40-50 बच्चों के बीच टीचर हर एक पर खास ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे में बच्चे पर पढ़ाई का बोझ और स्ट्रेस बढ़ने लगता है।
अगर आप भी अपने बच्चे को पढ़ाई के कारण परेशान या तनाव में देखते हैं, तो शायद उसे थोड़ी एक्स्ट्रा हेल्प की जरूरत है। आइए जानते हैं वो 6 बड़े संकेत जो बताते हैं कि अब आपके बच्चे को एक ‘होम ट्यूटर’ की जरूरत है।
लगातार नंबरों का कम होना
अगर आपका बच्चा पहले पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार उसके नंबर कम आ रहे हैं, तो यह एक बड़ा अलर्ट है। किसी खास विषय में लगातार खराब प्रदर्शन यह बताता है कि बच्चे को वह विषय समझ में नहीं आ रहा है और उसे वहां एक पर्सनल गाइडेंस की जरूरत है।
होमवर्क के नाम से जी चुराना या घबराना
क्या आपका बच्चा होमवर्क करने के समय अक्सर बहाने बनाता है? या फिर किताबें खोलते ही उसे नींद या थकावट महसूस होने लगती है? बच्चे आमतौर पर उसी काम से भागते हैं जो उन्हें समझ नहीं आता। एक अच्छा ट्यूटर पढ़ाई के तरीके को मजेदार बनाकर बच्चे के इस डर को दूर कर सकता है।
‘बेसिक्स’ का कमजोर होना
अगर बच्चा अपनी पुरानी क्लास की बुनियादी बातें ही भूल गया है, तो उसे नई क्लास का सिलेबस समझने में बहुत दिक्कत होगी। उदाहरण के लिए, अगर उसे गुणा-भाग ठीक से नहीं आता, तो वह आगे के बड़े सवाल हल नहीं कर पाएगा। एक होम ट्यूटर बच्चे के बेसिक्स क्लियर करने के लिए उसके साथ पूरी तसल्ली से काम कर सकता है।
पढ़ाई को लेकर चिड़चिड़ापन और भारी स्ट्रेस
जब बच्चा लगातार कोशिश करने के बाद भी किसी विषय को नहीं समझ पाता, तो वह अंदर ही अंदर फ्रस्ट्रेट होने लगता है। इसका असर उसके व्यवहार पर पड़ता है। अगर आपका बच्चा पढ़ाई की बात आते ही चिड़चिड़ा हो जाता है, रोने लगता है या खुद को कमरे में बंद कर लेता है, तो उसे डांटने के बजाय एक मददगार ट्यूटर की जरूरत है।
आत्मविश्वास में भारी कमी आना
“मुझसे यह नहीं होगा”, “मैं क्लास में सबसे वीक हूं” या “मुझे कुछ समझ नहीं आता” – अगर आपका बच्चा ऐसी बातें बोलने लगा है, तो इसका मतलब है कि उसका आत्मविश्वास डगमगा गया है। ट्यूटर बच्चे को उसकी स्पीड के हिसाब से पढ़ाता है, जिससे बच्चे को धीरे-धीरे चीजें समझ आने लगती हैं और उसका खोया हुआ कॉन्फिडेंस वापस लौट आता है।
माता-पिता के पास समय की कमी या सिलेबस का बदलना
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता दोनों वर्किंग होते हैं और उनके पास बच्चे को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचता। इसके अलावा, आज पढ़ाई का तरीका और सिलेबस भी हमारे समय से काफी बदल गया है। ऐसे में एक प्रोफेशनल ट्यूटर, जो नए सिलेबस से अपडेटेड हो, बच्चे के लिए सबसे सही विकल्प साबित होता है।
होम ट्यूटर लगाना इस बात का संकेत बिल्कुल नहीं है कि आपका बच्चा कमजोर है। इसका सीधा-सा मतलब है कि आप उसकी सफलता के लिए उसे एक सही दिशा और ‘हेल्पिंग हैंड’ दे रहे हैं। सही समय पर मिली मदद आपके बच्चे के भविष्य को संवार सकती है और उसके चेहरे की वो प्यारी-सी मुस्कान वापस ला सकती है।





