कंधे पर टिकी मिसाइल और खतरे में अमेरिका की ताकत

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच अब जंग का चेहरा तेजी से बदल रहा है और इसकी सबसे बड़ी वजह बना है एक छोटा लेकिन बेहद घातक हथियार मैनपैड्स।
इसका पूरा नाम है मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम, यानी ऐसा मिसाइल जिसे एक अकेला सैनिक अपने कंधे पर रखकर दाग सकता है। दिखने में साधारण, लेकिन असर इतना बड़ा कि यह दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों को भी आसमान से गिरा सकता है।
ये मिसाइलें मुख्य रूप से इंफ्रारेड तकनीक से काम करती हैं, यानी विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी को पकड़कर उसे निशाना बनाती हैं। इसके अलावा कुछ सिस्टम ऐसे भी होते हैं जिन्हें सैनिक अपनी नजर से गाइड करता है और कुछ लेजर बीम से लक्ष्य तय करते हैं, यानी तकनीक कई तरह की, लेकिन निशाना एक ही दुश्मन का विमान।
क्या है खासियत?
इन मिसाइलों की सबसे खतरनाक बात यह है कि ये आवाज की रफ्तार से लगभग दोगुनी गति से उड़ती हैं और करीब पांच किलोमीटर तक की ऊंचाई पर मार कर सकती हैं। इन्हें छिपाना आसान है, कहीं भी ले जाया जा सकता है और इनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता, इसलिए इन्हें ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
यही वजह है कि सीमित संसाधनों वाली सेनाएं ही नहीं, बल्कि आतंकी संगठन भी इन्हें बेहद प्रभावी हथियार मानते हैं।हाल के संघर्ष में ईरान ने जिस तरह अमेरिकी वायुशक्ति को चुनौती दी है, उसने दुनिया को चौंका दिया है। तीन अप्रैल को एफ-15ई स्ट्राइक इगल और ए-10 वार्थोग जैसे ताकतवर विमान गिराए गए।
इसके अलावा केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर जैसे हवा में ईंधन भरने वाले विमानों को नुकसान पहुंचा, एक ई-3 सेंट्री अवाक्स जो आसमान में उड़ता हुआ रडार माना जाता है भी निशाना बना। यहां तक कि पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर एफ-35 लाइटनिंग को भी जमीनी हमले का सामना करना पड़ा और हैरानी की बात यह रही कि अमेरिका ने अपने ही तीन एफ-15ई विमान फ्रेंडली फायर में खो दिए यानी जंग अब सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि भ्रम और दबाव की भी परीक्षा बन चुकी है।
क्या है असली खतरा?
असली खतरा तब, जब जंग जमीन पर उतरेगीफिलहाल अमेरिका के पास एयर सुपीरियारिटी है, यानी वह बिना ज्यादा रुकावट के हवाई हमले कर सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा खत्म हो गया है। असली चुनौती तब सामने आएगी जब अमेरिका अपने सैनिकों को जमीन पर उतारेगा।
क्योंकि जमीन पर लड़ाई के दौरान लड़ाकू विमान नीचे उड़ते हैं, ताकि अपने सैनिकों को सटीक मदद दे सकें और यही वह पल होता है जब मैनपैड्स सबसे ज्यादा घातक साबित होते हैं।नीचे, धीमी और तय रास्ते पर उड़ते विमान ऐसे मिसाइलों के लिए आसान निशाना बन जाते हैं।
ईरान की भौगोलिक स्थिति इस खतरे को और खतरनाक बना देती है। ऊंचे-नीचे पहाड़, संकरी घाटियां और छिपने की अनगिनत जगहें यहां एक सैनिक कहीं भी छिपकर कंधे पर मिसाइल लिए इंतजार कर सकता है। जैसे ही विमान पास आएगा, हमला हो सकता है।
चीन की भूमिका शक के घेरे में
इस वजह से अमेरिका के लिए सीईएडी यानी दुश्मन की एयर डिफेंस को खत्म करना बेहद मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि दुश्मन कोई एक जगह नहीं, बल्कि हर जगह फैला हो सकता है।अभी अमेरिका के ज्यादातर हमले ऊंचाई से हो रहे हैं, जहां मैनपैड्स की पहुंच सीमित है।
लेकिन जैसे ही जंग का फोकस जमीन पर आएगा, खतरा अचानक कई गुना बढ़ जाएगा। यही वजह है कि यह हथियार अभी से नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनता दिख रहा है।चीन का साया, जंग के पीछे चल रहा बड़ा खेलइस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका भी शक के घेरे में है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरान को जल्द ही एक हजार से ज्यादा मैनपैड्स मिल सकते हैं, जिन्हें सीधे नहीं बल्कि किसी तीसरे देश के जरिए पहुंचाया जा सकता है, ताकि खुलकर आरोप न लगे। हालांकि चीन ने इन रिपोर्ट्स को मनगढ़ंत बताया है, लेकिन हालात कुछ और ही इशारा करते हैं।
चीनी जासूसी सैटेलाइट
रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान पहले ही चीन की मदद से एक नया एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर चुका है और उसने एक चीनी जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल कर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके अलावा चीन से सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल खरीदने की कोशिश भी सामने आई है, जो समुद्र में अमेरिकी जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
ऐसे में तस्वीर साफ होती जा रही है, यह सिर्फ अमेरिका और ईरान की लड़ाई नहीं, बल्कि इसके पीछे बड़ी वैश्विक ताकतों का टकराव भी छिपा है। अगर ईरान को बड़े पैमाने पर ऐसे हथियार मिलते हैं, तो जंग का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।





