पाकिस्तान में सेना और खुफिया एजेंसी ISI के संबंधों में दरार

पाकिस्तान में सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के बीच दरार की खबर है। इसके चलते सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर ने आईएसआई के शीर्ष पदों पर व्यापक बदलाव किया है। ऐसा हाल के महीनों में कई मामलों की पूर्व जानकारी न जुटा पाने के चलते किया गया।
इस तरह के मामलों में पाकिस्तानी सेना को बड़ी चोट खानी पड़ी और चरमपंथियों के हमलों में तमाम सैनिक गंवाने पड़े। अफगानिस्तान के साथ चल रही लड़ाई से पूर्व में आईएसआई की भूमिका को कमजोर पाया गया है।
पाकिस्तान में सेना और आईएसआई के मिलकर कार्य करने का इतिहास रहा है। यही दोनों संगठन पाकिस्तान में सरकार की दशा और दिशा भी तय करते हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनकी चाल बदल गई है।
हाल के महीनों में सेना को कई मौकों पर नीचा देखना पड़ा है या तीखी आलोचना झेलनी पड़ी है। चरमपंथी संगठन टीटीपी और बलूच लड़ाकों ने सेना की नाक में दम रखा है लेकिन उन्हें रोकने के लिए आईएसआई कुछ खास नहीं कर पाई।
देश के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में टीटीपी की समानांतर सरकार चलती है और वहां पर चेक प्वाइंट बनाकर लड़ाके वसूली भी कर रहे हैं। कमोबेश ऐसे ही हालात बलूचिस्तान प्रांत के हैं।
वहां पर पाकिस्तानी सेना के तमाम सैनिक मारे जा चुके हैं और कई सीमा चौकियों पर हमले हुए हैं। लेकिन आईएसआई उनके बारे में कोई पूर्व सूचना नहीं जुटा सकी।
मुनीर ने इसी सप्ताह सेना और आईएसआई के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की है। बैठक में तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान नेशनल एजेंसी (बीएलए) के खात्मे के लिए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
आईएसआई अफसरों को साफ संदेश दिया गया प्रदर्शन बेहतर करें या फिर हटने के लिए तैयार हो जाएं। इस निर्देश खुफिया संगठन के कई बड़े अधिकारी हटाए गए हैं।
मुनीर ने सेना की खुफिया शाखा का भी आकार छोटा किया है। बताते हैं कि आईएसआई को मुनीर का यह हस्तक्षेप रास नहीं आया है। लेकिन अफगानिस्तान से चल रहे युद्ध की वजह से आईएसआई फिलहाल चुप है





