क्या अमेरिका ने कराया था इमरान खान का तख्तापलट?

क्या पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान को पाकिस्तान की सत्ता से बेदखल करने में अमेरिका का हाथ था? ये सवाल फिर एक बार से सामने आया है। क्योंकि एक क्लासिफाइड हाई-लेवल पाकिस्तानी डिप्लोमैटिक टेलीग्राम सामने आया है, जो इस बात का पक्का संकेत देता है कि इस्लामाबाद में इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने के लिए अमेरिका समर्थित एक कथित साजिश रची गई थी।

ड्रॉप साइट न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, 7 मार्च, 2022 का यह सीक्रेट डिप्लोमैटिक दस्तावेज उस राजनीतिक उथल-पुथल में अमेरिका की कथित संलिप्तता के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है जिसके चलते आखिरकार इमरान को सत्ता से हटना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

यह घटनाक्रम ऐसे समय में फिर से सुर्खियों में आया है, जब पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंध एक बार फिर चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसकी वजह यह है कि इस्लामाबाद, वॉशिंगटन और ईरान के बीच चल रहे क्षेत्रीय संकट को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने की कथित कोशिशें कर रहा है।

पाकिस्तान में अभी शहबाज शरीफ की सरकार है, जो इमरान खान के विरोधी खेमे से आते हैं। वहीं देश की शक्तिशाली सैन्य व्यवस्था की कमान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हाथों में है, जिन्हें उनका विरोधी माना जाता है।

दस्तावेज में क्या दावा किया गया?

रिपोर्ट के अनुसार, I-0678 नंबर वाला यह दस्तावेज पाकिस्तान के तत्कालीन वॉशिंगटन दूत असद मजीद खान ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए तत्कालीन अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू के साथ लंच मीटिंग के बाद इस्लामाबाद भेजा था।

दस्तावेज के अनुसार, लू ने इमरान खान की विदेश नीति के रुख पर खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के मामले में चिंता जताई थी। लू ने कहा, “यहां के लोग इस बात को लेकर काफी चिंतित हैं कि पाकिस्तान यूक्रेन के मामले में इतना आक्रामक रूप से तटस्थ रुख क्यों अपना रहा है। अगर ऐसा रुख अपनाना संभव भी है। हमें तो यह तटस्थ रुख नहीं लगता।”

‘वॉशिंगटन में सब माफ कर दिया जाएगा’

दस्तावेज में आगे कहा गया है कि लू ने सुझाव दिया कि अगर इमरान खान को संसदीय अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया जाता है तो वॉशिंगटन की चिंताएं कम हो सकती हैं।

लू ने कहा, “मुझे लगता है कि अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है तो वॉशिंगटन में सब कुछ माफ कर दिया जाएगा, क्योंकि रूस दौरे को प्रधानमंत्री का निजी फैसला माना जा रहा है। नहीं तो मुझे लगता है कि आगे का रास्ता मुश्किल होगा।”

इन टिप्पणियों को वॉशिंगटन में इमरान के प्रति विरोधी भावना का स्पष्ट सबूत माना गया। इसकी वजह व्लादिमीर पुतिन और रूस के साथ उनकी कथित नजदीकी थी।

अपने खुद के आकलन में राजदूत असद मजीद खान ने कथित तौर पर लिखा कि लू व्हाइट हाउस की स्पष्ट मंजूरी के बिना इतनी सख्त बात नहीं कह सकते थे और उन्होंने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक प्रक्रिया पर अपनी सीमा से बाहर जाकर बात की थी।

दस्तावेज से मैच होती इमरान के सत्ता परिवर्तन की बात

दस्तावेज में जिस बैठक का जिक्र है उसके महज कुछ हफ्तों बाद ही 9 अप्रैल, 2022 को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए खान को सत्ता से हटा दिया गया था। वे 2023 से ही जेल में बंद हैं और फिलहाल उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है।

खान और उनकी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने बार-बार यह आरोप लगाया है कि विदेशी ताकतों और पाकिस्तान की सैन्य संस्था ने मिलकर उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलने का काम किया।

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