ईयू के नेताओं संग विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की इन मुद्दों पर की चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (ईयू) के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। इस बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसके प्रभाव पर चर्चा की गई।

ईरान द्वारा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को अवरुद्ध किए जाने के बाद बढ़े तेल और गैस के दामों पर चिंता जताते हुए जयशंकर ने संकट के समाधान के लिए संवाद एवं कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एफटीए को अंतिम रूप देना भारत और ईयू के संबंधों में एक अहम मोड़ है।

एफटीए : द्विपक्षीय संबंधों का टर्निंग प्वाइंट
जयशंकर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को संबंधों के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया।

उन्होंने कहा कि एफटीए न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं की विशाल क्षमता को अनलाक करेगा, बल्कि उनकी रणनीतिक भागीदारी को भी नई गहराई देगा।

उन्होंने दोनों पक्षों से व्यापार और निवेश प्रोत्साहन में एक-दूसरे की सक्रिय सहायता करने का आह्वान किया ताकि जमीनी स्तर पर इसके लाभ मिल सकें।

रक्षा सहयोग व तकनीक पर रणनीतिक दृष्टि
विदेश मंत्री ने व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद को और अधिक ‘परिणामोन्मुखी’ बनाने और इसे महत्वपूर्ण एवं अत्याधुनिक तकनीकों में सहयोग के लिए पुनर्गठित करने का सुझाव दिया।

जयशंकर ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को गहरा करने पर भी जोर दिया। बैठक के दौरान उन्होंने यूक्रेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर भी चर्चा की।

उन्होंने एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने और बहुपक्षवाद को मजबूत करने में भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते तालमेल को रेखांकित किया।

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