नागपुर में ही 28 करोड़ से अधिक का सालाना अवैध ‘बीफ’ कारोबार, लगा है प्रतिबंध

नागपुर. नागपुर के अवैध कत्लखानों से रोजाना एक ट्रक “बीफ’ (गोमांस) बाहर भेजा जा रहा है। सुकृष्ट निर्माण चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध संचालक कनकराय उर्फ कनूभाई सावड़िया की मानें तो एक गाड़ी में 8 हजार िकलोग्राम मांस होता है। 100 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से एक दिन में 8 लाख रुपए का माल भेजा जाता है। एक साल में यह आंकड़ा 28 करोड़ 80 लाख रुपए हो जाता है। यहां के कामठी, गड्डीगोदाम, टेका नाका, यशोधरा नगर आदि स्थानों पर अवैध कत्लखानों का संचालन हो रहा है। यहां से वाले “बीफ’ हैदराबाद और औरंगाबाद के कारखानों तक भेजा जाता है। इन कारखानों से सर्टिफाइड होकर और प्रोसेसिंग से गुजरने के बाद यह माल विदेशों में तक पहुंचाया जाता है।
नागपुर में ही 28 करोड़ से अधिक का सालाना अवैध ‘बीफ’ कारोबार, लगा है प्रतिबंध
– हाल ही में नागपुर के जलालखेड़ा तहसील के हत्थीखाना गांव के रहने वाले सलीम इस्माइल शाह को गोमांस ले जाने के आरोप में गोरक्षकों ने जमकर पीटा था। यह राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना। पूरे मामले में खास बात यह है कि जब महाराष्ट्र में मार्च 2015 में गोवंश काटने पर प्रतिबंध लग गया तो यह मांस कहां से आया?
– इस सवाल के जवाब में भास्कर ने नागपुर और इसके आस-पास के क्षेत्र में गोमांस पर पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। केवल नागपुर में ही प्रतिबंध के बाद 28 करोड़ 80 लाख का सालाना अवैध गोमांस (बीफ) का कारोबार होता है। इसके बाद विदर्भ में अमरावती इस कारोबार का दूसरा बड़ा सेंटर है। दोनों ही जगह समय-समय पर इस कारोबार से जुड़े लोग व गोमांस पकड़ा भी गया। इस अवैध कारोबार की पुष्टि के लिए ये मामले काफी हैं। मगर अधिकांश बार इस मामले में प्रशासन और पुलिस कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं।
 
3 वर्ष में 435 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई
पिछले तीन वर्ष में नागपुर, गोंदिया, गड़चिरोली व अन्य जिले में पुलिस ने 435 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। इन आरोपियों से इन तीन वर्षों (2014 से जुलाई के दूसरे सप्ताह 2017 तक) में लगभग 35 हजार िकलोग्राम “बीफ’ बरामद किया गया है। इसे अदालत के आदेश पर नष्ट िकया गया। इस साल “बीफ’ के 40 से अधिक मामले नागपुर शहर और ग्रामीण थानों में दर्ज हो चुके हैं।
नियमों का होता है कत्ल
जानकारों की मानें तो िकसी भी कत्लखाने में नियमों का पालन नहीं होता है। देश में “बीफ’ (गोमांस) के बढ़ते कारोबार के लिए प्रशासन की लचर नीति को गोरक्षक संगठन जिम्मेदार मानता है। गाेरक्षक संगठनों का कहना है िक जब तक सरकार “बीफ’ के मामले में गंभीर नहीं बनेगी। यह कारोबार इसी तरह फलता-फूलता रहेगा। इन सब के लिए कहीं न कहीं प्रशासन के संबंधित विभाग की िजम्मेदारी बनती है। लेकिन वे अपनी इस िजम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
 
आसान काम नहीं संचालन
लाइसेंस लेकर कत्लखाना चलाना आसान काम नहीं है। इसके लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है। पशु संवर्धन विभाग, महानगरपालिका, पुलिस, फूड एंड ड्रग विभाग, पर्यावरण विभाग, आरटीओ सहित 8 से 10 विभागों की एनओसी लेनी पड़ती है। दावा यह भी किया जा रहा है कि सारी औपचारिकता पूरी करके भी नियमों का ख्याल नहीं रखा जाता। सरकारी विभाग इसको लेकर गंभीर भी नहीं रहते। भैंस के नाम पर “बीफ’ का कारोबार हो रहा है। फूड एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट 2006 व एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के नियम व शर्तों को ताक पर रखकर यह कार्य किया जा रहा है।
 
एक हजार में बिक रहीं गायें
गायों के साथ उनके बछड़ों के चोरी होने के मामले बढ़ रहे हैं। इसके लिए बाकायदा पूरा गिरोह काम कर रहा है। एक हजार रुपए में एक गाय बिक रही है। पशु तस्कर इन गायों को कत्लखाने तक पहुंचाते हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसी गायें जो अब दूध नहीं दे रहीं वह 15-20 हजार रुपए में बिक रही हैं।
 
एक सप्ताह में मिलती है रिपोर्ट
गोवंश को बचाने का कार्य करने वाली शहर की सुकृत निर्माण चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध संचालक कनकराय उर्फ कनूभाई सावड़िया का कहना है िक मांस की जांच रहाटे कॉलोनी चौक की फारेंसिक लैब में होती है। पहले जांच के लिए तीन महीने का समय लगता था, अब एक सप्ताह में रिपोर्ट मिल जाती है। उधर, सेवानिवृत्त पशु िचकित्सक श्याम काले का कहना है िक एक हेल्दी जानवर से करीब सवा दो सौ किलो मांस निकलता है। अवैध कत्लखाने सेहत के लिए भी हानिकारक हैं। जानवरों के शरीर से निकलने वाला अनुपयोगी मटेरियल पर्यावरण के लिए भी खतरा है।
 
खुलेआम हो रहा है अवैध कारोबार
^नागपुर जिले में 20 गोरक्षण संस्थाएं हैं। इन संस्थाओं के लिए कार्य करने वाले गोरक्षक गाय और बछड़ों की तस्करी करने वालों पर नजर रखते हैं। खुलेआम रोज विदर्भ में एक करोड़ से अधिक का गोमांस का अवैध कारोबार हो रहा है। इससे जुड़ी जानकारियां समय-समय पर हमारे पास आती हैं। हम प्रशासन को बता-बता कर परेशान हैं, मगर कोई कार्रवाई नहीं होती। पिछले कुछ महीने में नागपुर, मौदा, कामठी, यशोधरा नगर और वणी में बडी संख्या में गायों और बछड़ों को पुलिस की मदद से मुक्त कराया गया है।
-कनकराय उर्फ कनूभाई सावड़िया, प्रबंध संचालक, सुकृष्ट निर्माण चैरिटेबल ट्रस्ट
 
ऐसे पहचानते हैं विशेषज्ञ
आसान नहीं है पता करना
^मटन लाल कलर का होता है। लेकिन “बीफ’ हल्का गुलाबी रंग का होता है। इसके पीस बड़े होते हैं। हालांकि “बीफ’ के तहत गाय, बैल भैंस का मांस आता है। इसलिए “बीफ’ किसका है, यह आसानी से नहीं पता चल पाता। इसके िलए प्रयोगशाला में ही संबंधित नमूने को भेज कर जांचा जा सकता है। इसके अलावा नागपुर महानगरपालिका की ओर से एक स्लॉटर हाउस का संचालन भांडेवाड़ी में हो रहा है। पहले इसे किराये पर दिया गया था। परंतु नियमों की अनदेखी हो रही थी। इसको देखते हुए महानगरपालिका ने संचालन खुद करना प्रारंभ कर दिया।
-डॉ. गजेंद्र महल्ले, पशु चिकित्सक, मनपा
6 घंटे के अंदर पहचान आसान
^कटने के छह घंटे के अंदर अगर “बीफ’ बरामद हो जाए तो पहचान करना आसान हो जाता है। इससे ज्यादा समय बीत जाने पर “बीफ’ को पहचानना जरा मुश्किल कार्य है। “बीफ’ (गोमांस) का रंग हल्का गुलाबी होता है। भैंस के मांस से अलग नजर आता है। इसकी पहचान विशेषज्ञ ही कर सकते हैं। “बीफ’ की जांच प्रयोगशाला में ही हो सकती है।
-डॉ. श्याम काले, सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक, नागपुर।
 
पुलिस की सिर्फ इतनी भूमिका
^जब भी जानवरों की तस्करी के मामले सामने आते हैं, तब पुलिस की सिर्फ इतनी भूमिका होती है िक वह घटनास्थल पर पहुंचकर वहां की स्थिति को संभाले ताकि वहां पर िकसी तरह शांति भंग न हो पाए।
-डॉ. के. व्यंकटेशम, पुलिस आयुक्त, नागपुर शहर
खुली आंखों से पहचान मुश्किल
^मटन और “बीफ’ को बिना जानकार खुली आंखों से नहीं पहचाना जा सकता। दोनों में फर्क करना बहुत कठिन है। इसकी जांच डीएनए स्तर पर प्रयोगशाला में ही की जा सकती है कि मांस का नमूना “बीफ’ है या मटन। हैदराबाद की प्रयोगशाला में सूक्ष्म जांच की जाती है।
-डॉ. आर.बी. कडू, पशु चिकित्सक
 
तीन साल में 1 करोड़ 9 लाख का गोमांस जब्त
-अमरावती शहर में विगत 2015 से जुलाई 2017 के बीच पुलिस ने मवेशियों की ढुलाई तथा गौमांस के 62 मामले पकड़े। इसमें 1 करोड़ 9 लाख 13 हजार 960 रुपए का गोमांस जब्त कर 686 मवेशियों को “जीवनदान’ दिया है। बावजूद इसके आज भी अवैध मवेशियों की ढुलाई व कटाई खुलेआम चल रही है। 
पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में गोहत्या व मवेशी ढुलाई के 18 मामले दर्ज हुए थे। 37 आरोपियों को गिरफ्तार कर 13 वाहन जब्त किए गए। इसी तरह 2016 में 25 मामले सामने आए। इसमें 217 मवेशियों को मुक्त कराया गया। 9 लाख 35 हजार का गोमांस पुलिस ने जब्त कर 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसमें 26 वाहन आज भी जब्त हैं। इन दो वर्षों में दाखिल हुए मामलों में पुलिस द्वारा 36 मामलों में चार्जशीट न्यायालय में पेश की गई है।
6 माह में 19 मामले
मवेशियों की तस्करी व कटाई के विगत 6 माह में 19 मामले दर्ज हैं। इसमें बडनेरा थाना क्षेत्र में 3, वलगांव 3, फ्रेजरपुरा 3, गाडगे नगर 3, नागपुरी गेट 4, नांदगांव पेठ 2, राजापेठ में एक मामले शामिल हैं। इन पुलिस थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मवेशियों की ढुलाई के साथ-साथ अवैध कटाई भी होती है।
 
छह माह मेें 19 मामले दर्ज
तमाम सख्ती के बावजूद विगत 6 महीने में गोहत्या व मवेशियों की ढुलाई के 19 मामले दर्ज हुए हैं। इसमें 305 मवेशियों को मुक्त कराया गया है। 8 लाख 34 हजार का गोमांस पुलिस ने जब्त किया। इसके अलावा इस 19 मामलों में 49 आरोपियों को गिरफ्तार कर 16 वाहन जब्त किए गए हैं। शहर में एक ही कत्ल खाना है, जो कुछ तकनीकी खामियों से बंद पड़ा है। उसी वजह से शहर में अवैध कत्लखाने फल-फूल रहे हैं। अमरावती शहर में नागपुरी गेट, खोलापुरी गेट, गाडगे नगर, फ्रेजरपुरा, बडनेरा, नांदगांव पेठ आदि थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मवेशियों की अवैध कटाई की जा रही।
 
बूचड़खाने को इजाजत का इंतजार
– शहर में अत्याधुनिक बूचड़खाना शुरू करने को लेकर विगत कई वर्षों से मनपा प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों में कई बाधाएं सामने आई हैं। इस बीच आखिरकार मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मनपा को अपने स्तर पर बूचड़खाना शुरू करने के आदेश दे दिए गए हैं। बीओटी के आधार पर वलगांव रोड स्थित ट्रक ट्रांसपोर्ट समीप अत्याधुनिक बूचड़खाने का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के प्रमाणपत्र का इंतजार है। पशु वैद्यकीय विभाग के अधिकारी डॉ. सुधीर गावंडे ने बताया कि फिलहाल शहर में कोई भी बूचड़खाना नहीं चल रहा है। मनपा प्रशासन द्वारा बोओटी के आधार पर वर्ष 2010 में फिजा एक्सपोर्ट के जरिए वलगांव रोड पर अत्याधुनिक बूचड़खाना बनवाया गया है। डाॅ. गावंडे ने बताया कि बूचड़खाने में गोवंश का इस्तेमाल नहीं होगा।
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