पत्नी को मनोरोगी बताकर मांगा तलाक, याचिका हुई खारिज

मुंबई. पत्नी को मनोरोगी व झगड़ालू बतानेवाले पति को बाॅम्बे हाईकोर्ट ने तलाक देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने पति की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अभय ओक व न्यायमूर्ति अनूजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने साफ किया कि पति ने पत्नी पर जो आरोप लगाए है वह उनको लेकर सबूत नहीं पेश कर पाया है। इसलिए उसकी तलाक की मांग पर विचार नहीं किया जा सकता है। मामले से जुड़े दंपति ने 6 जुलाई 1994 में विवाह किया था। शादी के समय पति के पहले से दो बच्चे थे। जिसमेें से एक की उम्र 15 साल थी जबकि दूसरे की उम्र आठ साल थी।
पत्नी को मनोरोगी बताकर मांगा तलाक, याचिका हुई खारिज
 
पेशे से एयरहोस्टेज पत्नी ने पति को आश्वस्त किया था कि वह बच्चों की परवरिश में उसे अपना सहयोग देगी। लेकिन शादी के दूसरे दिन से ही पत्नी की बच्चों से अनबन शुरू हो गई। फिर दोनों ने करीब 6 साल साथ में बिताए, लेकिन बाद में दोनों का साथ रहना मुश्किल हो गया। पत्नी के झगड़ों से तंग आकर पति ने मुंबई की पारिवारिक अदालत में तलाक के लिए आवेदन दायर किया।
 
विधायक कदम ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
अन्नाभाउ साठे महामंडल में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद विधायक रमेश कदम ने बाॅम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कदम ने महानगर के नागपाड़ा पुलिस स्टेशन में तैनात एक पुलिसकर्मी पर बदसलूकी व पैसे मांगने का अारोप लगाया है। साथ ही पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
 
याचिका में कदम ने कहा है कि सहायक पुलिस निरीक्षक मनोज पवार ने मेडिकल चेकअप कराने के एवज में मुझसे 25 हजार रुपए मांगे थे पर जब मैंने पैसे देने से मना कर दिया तो पवार ने मेरे साथ अशिष्ट बरताव किया। कदम ने मांग की है कि आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत जांच की जानी चाहिए।
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