सूर्योदय-सूर्यास्‍त के समय क्‍यों आती है हरी रोशनी?

सूर्य को उगते और डूबते हुए सबने देखा है. लेकिन आपने कभी गौर किया है क‍ि सूर्यास्‍त और सूर्योदय के वक्‍त एक ऐसा भी पल आता है जब सूर्य हरे रंग में चमकता नजर आता है. कभी कभी सूर्यास्‍त के ठीक बाद, या सूर्योदय से ठीक पहले आप इस नजारे को देख सकते हैं. आख‍िर हरे रंग की चमक के पीछे वजह क्‍या है? साइंटिस्‍ट ने इसका कारण तलाशा है, जो आश्चर्यचक‍ित करने वाला है.

ग्लासगो विश्वविद्यालय के साइंटिस्‍ट जोहान्स कोर्टियल ने लाइव साइंस को बताया क‍ि आमतौर पर सूरज की रोशनी सफेद होती है. यह दृश्‍य प्रकाश की सभी वेबलेंथ से बनी होती है. लेकिन जब सफेद रोशनी क‍िसी उच्‍च घनत्‍व वाले माध्‍यम, जैसे कांच या पानी से एक कोण पर गुजरती है, तो अलग-अलग वेबलेंथ अलग होने लगती हैं. साइंस की भाषा में इसे रिफ्रेक्‍शन कहते हैं.

कब नजर आते इंद्रधनुषी रंग
धरती के वायुमंडल में अलग-अलग गैसे हैं, जिनकी अलग-अलग डेंसिटी है. ये भी प्रकाश को रिफ्लेक्‍ट करती हैं. यही कारण है कि हमें कभी-कभी सूर्य के चारों और इंद्रधनुषी रंग नजर आते हैं. रिफ्लेक्‍शन विशेष रूप से तब होता है, जब सूर्य होराइजन यानी क्ष‍ित‍िज के बिल्‍कुल करीब आता है. यानी जब वह धरती पर उगता हुआ या डूबता हुआ नजर आता है. चूंक‍ि सूर्य का प्रकाश एक विशेष कोण से धरती के वायुमंडल के सबसे मोटे ह‍िस्‍से में प्रवेश करता है, इसल‍िए हमें हरे रंग की फ्लैश दिखाई देती है.

आख‍िर हरे रंग की फ्लैश ही क्‍यों?
अब सवाल होगा क‍ि आख‍िर हरे रंग की फ्लैश ही क्‍यों? बता दें क‍ि हरा रंग, नीले और पीले रंगों का एक मिक्स्चर होता है. जब एक विशेष कोण पर सूर्य उगता या डूबता है तो नीला और पीले रंग की वेबलेंथ ओवरलैप होती है, जिससे यह रंग निकलकर आता है. अब आप इसे कैसे देख सकते हैं? तो इसके ल‍िए आपको क‍िसी समुद्र तट या ऊंचे पहाड़ों में जाना होगा. तटीय क्षेत्रों में यह नजारा आम होता है. जब ठंडे पानी के ऊपर गर्म हवा की एक परत होती है. हवा की ये परतें सूर्य के प्रकाश को र‍िफ्लेक्‍ट करने में मदद करती हैं.

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