राजनीतिक मंच पर अखिलेश का तनहां हो जाना

सियासत का खेल भी निराला है। जहां शक्ति केंद्रित होती है वहीं जुड़ाव देखा जाता है और जैसे ही व्यक्ति या संगठन शक्तिविहीन होता है वैसे ही बिखराव शुरू हो जाता है। ठीक वैसे ही जैसे कि शकर पर चींटियां मंडराती हैं। वर्तमान में कांग्रेस और भाजपा के भी यही हालात हैं। भाजपा देश स्तर पर कांग्रेस के लोगों को त़ोड़ने में लगी हुई है, जबकि चाहकर भी कांग्रेस अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को जोड़कर नहीं रख पा रही है।
इससे हटकर जब हम उत्तर प्रदेश के राजनीतिक पटल पर दृष्टि दौड़ाते हैं तो पाते हैं कि अब जो मुकाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हासिल हो चुका है वह पहले कभी अखिलेश यादव को हुआ करता था। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के पिता मुलायम सिंह बखूबी जानते थे। यही वजह थी कि योगी के शपथग्रहण समारोह के दौरान उन्होंने मंच पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कान में ऐसा कुछ कह दिया था जिसका असर उत्तर प्रदेश में साफ देखा गया, लेकिन मुलायम ने क्या कहा और मोदी ने क्या सुना यह तो दो लोगों के अलावा उनके फरिश्ते भी नहीं जान सके।

यही वजह है कि तब से अब तक राजनीतिक कयास लगाने का दौर चल रहा है। इस कहा सुनी के बाद मुलायम की चुनाव हार चुकी बहु के यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जाना और सब कुछ अच्छा ही अच्छा होगा जैसा उन्हें आश्वासन देना भी इसी काना-फूसी के नतीजे से जोड़कर देखा गया। कहने वालों ने कहा कि अखिलेश अब मोदी जी के विरोध में मुखर नहीं होंगे और राहुल गांधी से भी नजदीकियां खत्म कर देंगे, लेकिन इसका असर जरूर दिखाई नहीं दिया। संभवतŠ यही कारण था कि लोग पूछ रहे हैं कि आखिर मुलायम ने मोदी के कान में क्या कहा?
यहां प्रसंगवश फिल्म बाहुबली की याद आ गई। कपोल-कल्पित फिल्म बाहुबली ने देश और दुनिया में धूम मचाया क्योंकि लोगों को जानना था कि आखिर बाहुबली को कटप्पा ने क्यों मारा? फिल्म बनाने वाले दर्शकों की दीवानगी जानते हैं अतŠ उन्होंने इसका फायदा उठाया और बाहुबली-2 रजत पर्दे पर पेश करते हुए कहा कि लो अब जान लो कि बाहुबली को कटप्पा ने क्यों मारा था। इस प्रकार दर्शकों को दो साल बाद ही सही, लेकिन जवाब मिल गया कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा। कुछ इसी तरह का सवाल उत्तर प्रदेश की सियासत में 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से ही लोगों के मस्तिष्क में गूंज रहा है। यह वही पल था जबकि दो विपरीत ध्रुव आपस में मिल रहे थे और एक-दूसरे को पूरी तवज्जो देकर लोगों को हैरान कर रहे थे।
दरअसल मंच पर राजनीति के चतुर खिलाड़ी मुलायम सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के कान में कुछ यूं कहा मानों गूढ़ राजनीतिक फैसला बता दिया हो। उस समय मंच पर कई दिग्गज नेताओं के साथ ही साथ अखिलेश यादव भी नजर आ रहे थे। ठीक एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह। बस इसी क्षण के बाद से सूबे की सियासत में आंधी की तरह यह चर्चा चली कि आखिर मुलायम ने मोदी से क्या कहा? जिन्हें इसका जवाब चाहिए उन्हें अभी इंतजार करना होगा। इस सवाल के जवाब के लिए अगले पांच साल नहीं तो कम से कम 2019 के आम चुनाव तक तो इंतजार करना ही होगा। क्योंकि तब या तो प्रधानमंत्री मोदी बताएंगे कि उनसे मुलायम ने क्या कहा था या फिर मुलायम इसे राजनीतिक हथियार बनाकर जनता के बीच ले जाएंगे और तब सभी को पता चल ही जाएगा कि उस दौरान क्या कहा गया था।
बहरहाल यह समय पार्टी को टूटने से बचाने का है, लेकिन इसकी संभावना कम ही है, क्योंकि काफी लंबे समय से नाराज चल रहे अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव के राजनीतिक मैदान में सक्रिय होने का समय आ गया है। इसलिए उन्होंने अब उस नई पार्टी का ऐलान कर दिया है जिसे वो विगत 11 मार्च को करने जा रहे थे। खबरों के मुताबिक उस पार्टी का नाम ‘समाजवादी सेक्युलर मोर्चा’ रखा जाएगा और इसके मुखिया मुलायम सिहं यादव ही होंगे। इस प्रकार देखा जाए तो अब नेताजी बेटे से कुछ कहना-सुनना नहीं चाहते इसलिए उन्होंने भाई शिवपाल को नई पार्टी बनाने की मंजूरी दे दी है। वैसे मुलायम तो यही कह रहे हैं कि शिवपाल ने पार्टी की घोषणा उनसे पूछ कर नहीं की, फिर भी जो उनके मन में चल रहा था उसे ही तो शिवपाल ने उजागर किया है।
अगर यह खबर सही है तो फिर यह मान लेना चाहिए कि आने वाले दिनों में मुलायम के साथ अनेक दिग्गज नजर आएंगे। इनमें वो लोग भी होंगे जो कल तक अखिलेश की जय-जयकार करते नहीं थकते थे। चूंकि पूर्व से ही पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह को अपना नेता कहते चले आ रहे हैं अतŠ उन्हें मनाने के लिए शिवपाल को ज्यादा मशक्कत करना नहीं पड़ेगी। यह जरूर है कि अखिलेश का साथ उनकी पत्नी और प्रोफेसर चाचा रामगोपाल तो देंगे ही देंगे। अत:समझने वाले तो यही समझेंगे कि अभी अखिलेश तनहां नहीं रहेंगे, उनके साथ पुराने साथी जरूर दिखेंगे, लेकिन जब उनके पास सिवाए कहानी सुनाने के कोई काम ही नहीं बचेगा तो फिर क्योंकर लोग दरबार सजाने में दिलचस्पी दिखाएंगे। शिवपाल यादव पुरानी मिठाई को नई दुकान में रखकर बेचने का प्लान बना चुके हैं।
ऐसे में सबसे पहले वो अखिलेश खेमे को ही तोड़कर अपनी दुकान की मिठास बढ़ाने का उपक्रम करेंगे। इससे उनका किला भी मजबूत होगा। बावजूद इसके यह पता कर पाना बहुत मंश्किल काम होगा कि आखिर मुलायम ने मोदी के कान में क्या कहा था, क्योंकि अखिलेश तो अभी मजाक के मूड में दिख रहे हैं इसलिए वो मीडिया के सामने कहते देखे जा रहे हैं कि उनके पिता ने मोदी के कान में कहा था कि यह मेरा बेटा है और इससे जरा बचकर ही रहिए। विचारणीय है कि यदि मुलायम ने ऐसा ही कहा होगा तो अब मोदी तो दूर की बात है उनके अपने कहे जाने वाले करीबी भी उनसे बचकर ही चलेंगे, ऐसे में अखिलेश तनहां नजर आएं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
-साभार डॉ. हिदायत अहमद खान





