श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन में चढ़ाया जाएगा नैमिषारण्‍य का जल, अयोध्या से है गहरा नाता

सीतापुर। अट्ठासी हज़ार ऋषि मुनियों की तपोभूमि नैमिषारण्य तीर्थ और अयोध्या का अटूट सनातन संबंध रहा है। नैमिषारण्य की भूमि पर ही मनु सतरूपा ने 23 हजार वर्ष तपस्या की थी। यह बातें आज जगदाचार्य स्वामी देवेन्द्रानंद सरस्वती ने अयोध्या में रामलला मन्दिर भूमिपूजन के लिए तीर्थ से जल संग्रहण के दौरान कही।
सीतापुर के नैमिषारण्य में चक्रतीर्थ पर पूजन करते संतजहां नैमिषारण्य तीर्थ में नारदानन्द आश्रम से जगदाचार्य देवेन्द्रानंद सरस्वती, 84 कोसीय परिक्रमा समिति से संतोष दास खाकी, क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव व कई विशिष्टजनों की उपस्थिति में पुजारी राजनारायण पांडेय, आचार्य सचिन पांडेय द्वारा वैदिक पूजन के बीच राम मन्दिर निर्माण के लिए नैमिष तीर्थ अंतर्गत चक्रतीर्थ, काशीकुण्ड, पंचप्रयाग तीर्थ, सीताकुंड, दधीचि कुंड समेत सभी तीर्थो का जल संग्रहण कर अयोध्या धाम राम जन्मभूमि पूजन में भेजने की व्यवस्था की गई।
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव ने बताया कि 5 अगस्त का दिन शताब्दियों के इंतजार के बाद आया है। आज तीर्थ में सम्मानित संत-महंत व विशिष्टजनों की उपस्थिति में विधि विधान सहित पूजन के बाद तीर्थ अंतर्गत सभी तीर्थों का जल संग्रह किया गया है। यह जल 5 अगस्त को रामलला मंदिर के भूमि पूजन में प्रयोग किया जाएगा। यह नैमिष तीर्थ के साथ-साथ संपूर्ण सनातन धर्म के लोगों के लिए हर्ष और गौरव की बात है।
इसी कड़ी में नारदानन्द आश्रम से जगदाचार्य देवेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि संपूर्ण सनातन समाज और नैमिषारण्य तीर्थ इस अवसर पर हर्ष व्यक्त करता है। हम सभी की कामना है कि जल्द ही अयोध्या में राम मंदिर बने और हम सभी को रामलला के दर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिले। इस अवसर पर 84 कोसी परिक्रमा समिति के पदाधिकारी संतोष दास खाकी, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष मुनीन्द्र अवस्थी, भाजपा नेता राजेश शुक्ला समेत संघ और भाजपा के पदाधिकारी, पुरोहित व आम जन उपस्थित रहे। तीर्थभूमि के इस गौरव पर सभी ने हर्ष व्यक्त किया।

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