जयपुर बम ब्लास्ट केस का आया फैसला, कोर्ट ने चारों दोषियों को दी फांसी की सजा

 जयपुर बम ब्लास्ट 2008 के चारों दोषियों को 11 साल सात माह बाद शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई गई है। विशेष कोर्ट के जज अजय कुमार शर्मा ने सरवर आजमी, मोहम्मद सैफ, सैफुर रहमान और सलमान को सजा सुनाई है। ब्लास्ट के चारों आरोपितों को बुधवार को दोषी ठहराए जाने के बाद गुरुवार को सजा के बिंदुओं पर बहस हुई थी। बहस से पहले चारों दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया गया था। 

 

गौरतलब है कि 13 मई, 2008 को गुलाबी नगरी में आठ जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 71 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 185 घायल हुए थे। कोर्ट ने मुहम्मद सैफ, सैफुर्रहमान, सरवर आजमी और मुहम्मद सलमान को हत्या, राजद्रोह और विस्फोटक अधिनियम के तहत दोषी पाया है।

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इन्हें हुई फांसी की सजा

1. मुहम्मद सैफ उर्फ कैरीऑन, निवासी सरायमीर, आजमगढ़। दिसंबर 2008 में गिरफ्तारी हुई।

आरोप-गुलाबी नगरी में पहला बम धमाका इसी ने किया था। माणक चौक खंदा क्षेत्र में बम रखा। 

2. मुहम्मद सरवर आजमी, निवासी-चांद पट्टी, आजमगढ़। जनवरी 2009 में गिरफ्तारी। 

आरोप-चांदपोल हनुमान मंदिर के सामने बम रखा।

3. सैफुर उर्फ सैफुर्रहमान अंसारी, निवासी-आजमगढ़। अप्रैल 2009 में गिरफ्तारी। 

आरोप-फूल वालों का खंदा क्षेत्र में बम रखा।

4. मुहम्मद सलमान, निवासी- निजामाबाद, सरायमीर आजमगढ़। दिसंबर 2010 में गिरफ्तारी। 

आरोप-षड्यंत्र में शामिल, सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर के पास बम रखा।

जयपुर बम धमाकों में चार दोषी करार, 71 की ली थी जान

राजस्थान की राजधानी जयपुर में करीब 11 साल पहले हुए श्रृंखलाबद्ध आठ बम धमाकों के मामले में बुधवार को विशेष अदालत ने पांच आरोपितों में से चार को दोषी करार दिया। ये चारों उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। एक को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। धमाकों के 10 आरोपित थे, जिनमें से दो सितंबर 2008 में दिल्ली के बटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए थे और तीन अब भी फरार हैं। धमाकों में 71 लोगों की मौत हुई थी और 185 घायल हो गए थे। गौरतलब है कि जयपुर के परकोटा क्षेत्र में 13 मई, 2008 को शाम सवा सात से साढ़े सात बजे के बीच 15 मिनट में आठ बम धमाकों से गुलाबी नगरी दहल उठी थी।

शहर के व्यस्त इलाकों व बाजारों में हुए इन धमाकों से गुलाबी नगर रक्तरंजित हो गई थी। शहर के माणक चौक और कोतवाली थाने में इस मामले में चार-चार एफआइआर दर्ज की गई थीं। इनकी सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित की गई थी। 11 वर्ष सात माह बाद फैसलाधमाकों के 11 साल सात माह बाद बुधवार को विशेष कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जज अजय कुमार शर्मा ने करीब 250 पेज के फैसले में आरोपितों को भादंवि की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), 302 (हत्या), 307 (प्राणघातक हमला), 121ए (देश के खिलाफ अपराध), 124ए (राष्ट्रद्रोह), 153 ए (वैमनस्य फैलाना) और विस्फोटक पदार्थ निवारण अधिनियम तथा विधि विरुद्घ क्रियाकलाप अधिनियम के तहत दोषी माना है। इन धाराओं में चारों दोषियों को फांसी से लेकर उम्र कैद की सजा का प्रावधान है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 1272 और आरोपित पक्ष की ओर से 24 गवाह पेश किए गए थे।

ईमेल कर जिम्मेदारी लेने वाला दोषमुक्त

धमाकों के अगले दिन इंडियन मुजाहिदीन के नाम से ईमेल कर इन विस्फोटों की जिम्मेदारी लेने वाले मुहम्मद शहबाज अहमद, निवासी-लखनऊ को विशेष कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया। उसे सितंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन उसके खिलाफ सुबूत पेश नहीं कर सका।

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