वो पांच रस्में जिनके बिना विवाह के बाद अधूरी रहती है सुहागरात…

हिन्दू धर्म में 16 संस्कार बताए गए हैं। इनमें विवाह भी एक संस्कार है। इस संस्कार के द्वारा दो व्यक्ति ही नहीं बल्कि कई परिवार और आत्माओं का भी मिलन होता है ऐसा माना जाता है कि इस संस्कार में कई रीति रिवाज शामिल होते हैं जिनमें सुहागरात और उससे जुड़े रिवाज हैं।

सुहागरात को वर वधू की मिलन की रात कहा जाता है इसलिए इस दिन होने वाले कुछ रिवाज बड़े ही खास होते हैं जैसे दूध का गिलास लेकर दुल्हन का आना, कन्या को मुंह दिखाई देना।
ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि पूर्वज यानी पितृगण नाराज होते हैं तो संतान सुख में बाधा आती है। विवाह का सबसे बड़ा उद्देश्य संतान प्राप्ति और वंश को बढाना होता है इसलिए पूर्वजों की पूजा सुहागरात के दिन की जाती है।
शुक्र प्रेम और वासना का कारक ग्रह है तो चन्द्रमा मन का कारक ग्रह है। दूध का गिलास देने के पीछे यह उद्देश्य होता है कि पति पत्नी का प्रेम दूध की तरह उज्जवल, वासना और चंचलता रहित यानी स्थिर और धैर्य वाला रहे।
आज कल दुल्हन को इस रिवाज के तहत गहने, मोबाइल जैसे उपहार मिलने लगे हैं। दरअसल इस रिवाज के पीछे यह विश्वास होता है कि स्त्री जिसे अपने पत्नी के रूप में स्वीकार कर रही है वह इस योग्य है कि उसकी जरुरतों को पूरा कर सके। व्यवहारिक तौर पर देखा जाए तो उपहार देने के पीछे यह उद्देश्य होता है कि नए रिश्ते की शुरुआत अच्छी हो।





