पारा 45 पर टिका, लू के थपेड़े और सड़कों पर पसरा सन्नाटा

 आसमान से आग बरसी, लू के थपेड़ों ने बेहाल कर दिया। शुक्रवार को पारा 45 डिग्री पर आ टिका है। गुरुवार के मुकाबले यह एक डिग्री कम जरूर है लेकिन न्यूनतम तापमान में वृद्धि के चलते गर्मी का प्रकोप बना हुआ है। दोपहर में सड़कों से लेकर बाजार में सन्नाटा पसरा गया। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि शनिवार को सुबह से ही तेज धूप निकलेगी।

शुक्रवार को सुबह से तेज धूप निकली, इसके साथ ही लू का चलना शुरू हो गया। दोपहर 12 बजे के बाद बाहर निकलना मुश्किल हो गया, धूप में खड़े होने पर चक्कर आने लगे। पसीने से लोग नहाने लगे। गला सूखने के साथ ही हीट एग्जास्ट से पैरों में दर्द होने लगा। दोपहर एक बजे के बाद तेज धूप में एमजी रोड, कमला नगर, दयालबाग सहित शहर की सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। इससे अधिकतम तापमान 45 डिग्री दर्ज किया गया, यह गुरुवार को 46.3 डिग्री दर्ज किया गया था। वहीं, न्यूनतम तापमान 30 डिग्री रहा। इसमें गुरुवार के मुकाबले तीन डिग्री की वृद्धि दर्ज हुई है।

गड़बड़ाने लगा थर्मोस्टेट

एसएन के फिजीशियन डॉ. मृदुल चतुर्वेदी ने बताया कि हाइपोथैलेमस (मस्तिष्क) में स्थित थर्मोस्टेट बाहर के तापमान के हिसाब से शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है। तापमान 45 डिग्री के पार जाने पर थर्मोस्टेट गड़बड़ाने लगता है। इससे हीट एग्जोस्ट की समस्या होती है। इसमें सिर में दर्द, आंखों में चुभन और पैरों में जकडऩ होने लगती है। इसके बाद भी धूप में ज्यादा देर खड़े रहते हैं तो थर्मोस्टेट काम करना बंद कर देता है। यह हीट स्ट्रॉक है। इसमें शरीर का तापमान 105 से 106 डिग्री तक पहुंच जाता है। शरीर से पसीना आना बंद होने लगता है, चक्कर आने के बाद बेहोश हो जाते हैं। इससे मौत तक हो सकती है।

21 साल पहले 48 डिग्री पार पहुंचा था तापमान

पिछले कुछ सालों से अधिकतम तापमान 45 से 46 डिग्री के बीच रहा है। 21 साल पहले 1998 में तापमान 48.3 डिग्री तक पहुंचा था। 15 साल पहले तापमान 47 डिग्री तक पहुंच चुका है। इस बार तापमान 47 डिग्री तक पहुंचने की आशंका है।

बुखार संग बच्चों को डीहाइड्रेशन के साथ शॉक

एसएन के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज यादव ने बताया कि तापमान बढऩे पर बचों को उल्टी और दस्त हो रहे हैं। पानी पिलाने पर भी उल्टी हो जाती है, दो साल तक के बच्चों में उल्टी और दस्त से ब्लड वॉल्यूम कम होने लगता है। इससे खून गाढ़ा हो जाते है। इसके बाद भी शरीर में पानी न पहुंचने पर वह शॉक में जा सकता है। रीनल फेल्योर के साथ ही दिमाग में थक्का जम सकता है। ऐसे केस में मौत तक हो सकती है। वहीं, बुखार के मरीज भी बढ़े हैं।

बच्चों में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी होने के लक्षण

  • बच्चा सुस्त हो जाए
  • पानी ज्यादा पीना या पानी पीना बंद कर दे। मुंह सूखने लगे
  •  आंखे गड्ढे में धंस जाना
  •  स्किन ढीली हो जाए
  •  पेशाब का आना बंद हो जाना
बच्चों के लिए यह करें
  • बच्चे को दस्त के साथ उल्टी हो रही है, पानी देने पर भी उल्टी होने लगती है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • बच्चे को थोड़ी थोड़ी देर बाद केला, फल, दही, खिचड़ी दे सकते हैं।
  •  धूप से बचाएं, बाजार का खाना और फास्ट फूड ना दें।

हीट स्ट्रोक के लक्षण

  • तेज गर्मी का अहसास और बेचैनी।
  •  शरीर का तापमान 101 से 104 फारेनहाइट तक पहुंचना।
  •  अधिक तापमान के कारण बेहोशी आना।
  •  बार-बार प्यास लगना।
  •  चेहरा लाल, सिर दर्द, जी मचलाना और उल्टियां होना।

ये करें

  • शरीर को ठंडा करें। बर्फ की पट्टियां रखें।
  • कमरे में पंखे, कूलर चला लें
  •  डीहाइड्रेशन से बचाने के लिए ग्लूकोज और ओआरएस का घोल लेते रहें।
  •  धूप से बचें और तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें।

गर्मी में यह करें

  • शरीर को पूरी तरह से ढक कर बाहर निकले, आंखों पर चश्मा लगा लें।
  • थोड़ी-थोड़ी देर बाद ठंडा पानी पीते रहें। शिकंजी, छाछ सहित तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें।
  •  बाजार का खाना ना खाएं, इससे डायरिया और उल्टी हो सकती हैं। अपने साथ घर से खाना लेकर चलें।

जून अंत में प्री मानसून, जुलाई के प्रथम सप्ताह में आएगा मानसून

देश में चार जून को मानसून दस्तक देगा। वहीं, आगरा में 15 जून के आसपास प्री मानसून आना चाहिए। मगर, इस बार जून के अंत तक ही प्री मानसून दस्तक देगा। वहीं, 20 से 26 जून के बीच मानसून आना चाहिए। पिछले कुछ सालों से मानसून की बारिश जुलाई के प्रथम सप्ताह में हो रही है। इस बार भी मानसून के जुलाई के प्रथम सप्ताह में आने की उम्मीद है।

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