कार्बाइड से आम पकाने के लिए चाइनीज पुडिय़ा का प्रचलन भी तेजी से बढ़ा….

कार्बाइड से फलों को पकाना भले ही प्रतिबंधित हो लेकिन बाजार में इसका धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। फलों का राजा आम भी इससे अछूता नहीं है। यह पहचानना कि आम को पकाने के लिए कार्बाइड का प्रयोग किया गया है, आसान नहीं है। हाल के वर्षों में आम पकाने के लिए चाइनीज पुडिय़ा का प्रचलन भी तेजी से बढ़ा है। यह पुडिय़ा भी सेहत के लिए खतरनाक है। इसे पानी में भिगोने पर इथीलीन गैस निकलती है जो सेहत के लिए खतरनाक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके खतरे पर अभी शोध की जरूरत है।
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ.शैलेंद्र राजन बताते हैं कि आम की टोकरी या गत्ते के बीच कार्बाइड की पुडिय़ा रखी जाती है। नमी के संपर्क में आने पर पुडिय़ा फट जाती है और इससे इथीलीन गैस निकलती है जो फल को पकाने का काम करती है। गैस इस कदर असरदार होती है कि इसके संपर्क में आने पर फल तुरंत पक जाता है और इस फल के संपर्क में आने वाले दूसरे फल भी पकते चले जाते हैं। इथीलीन के साथ निकलने वाले अन्य तत्व कैंसरकारक होते हैं। उन्होंने कहा कि फल पकाने के लिए संस्थान ने इथीलीन जेनरेटर चैंबर की लो कॉस्ट तकनीक विकसित की है। साथ ही लगातार जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। 
बाजार में जल्दी आम पहुंचाने का लालच
उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक हार्टीकल्चर डॉ.अतुल कुमार सिंह बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में हर साल करीब 25 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। इसमें अकेले करीब 40 फीसद की हिस्सेदारी मलिहाबाद बेल्ट की है। आम तौर पर किसान आम तोड़कर व्यापारियों को बेचते हैं। व्यापारी इसे शीघ्र बाजार पहुंचाने के लालच में मंडी में ही कार्बाइड से पकाते हैं। कार्बाइड का प्रयोगी फल पकाने के लिए वर्जित है लेकिन इसकी आसानी से उपलब्धता प्रतिबंध पर भारी पड़ रही है। वेल्डिंग के लिए कार्बाइड का प्रयोग किया जाता है। यही वजह है कि यह आसानी से मिल जाती है।
पकडऩा मुश्किल, एक-दो दिन रुक कर करें इस्तेमाल
डा.सिंह बताते हैं कि कार्बाइड या चाइनीज पुडिय़ा को पेटी या डलिया में आम के बीच रात में रख देते हैं। सुबह तक फल पक कर तैयार हो जाता है। हालांकि कार्बाइड से पके फल के ऊपर पाउडर सा नजर आता है। लेकिन फल के ऊपर नेचुरल पाउडर भी होता है। इसलिए केवल पाउडर देखकर यह कहना मुश्किल है कि फल कार्बाइड से पकाया गया है। इसकी पुष्टि केवल प्रयोगशाला में जांच के बाद ही हो सकती है। यदि कार्बाइड से पकाये गए फल को एक-दो दिन के बाद प्रयोग करें तो नुकसान से कुछ हद तक बचा जा सकता है।
सुरक्षित है राइपेनिंग चैंबर
निदेशक उद्यान डॉ.आरपी सिंह के मुताबिक आम को पकाने का सबसे सुरक्षित तरीका है राइपेनिंग चैंबर। सरकार इनकी स्थापना के लिए 35 फीसद अनुदान भी देती है। प्रदेश में अब तक करीब दो दर्जन चैंबर स्थापित हो चुके हैं। इसमें पकाये जाने वाले आम या अन्य फल एक समान पकते हैं। यह देखने में तो अच्छे लगते ही हैं। अपेक्षाकृत टिकाऊ होने के साथ सेहत के लिए भी सुरक्षित होते हैं।
प्रदेश भर में अभियान का दावा
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का दावा है कि फलों में कार्बाइड का प्रयोग रोकने के लिए पूरे प्रदेश में सघन अभियान चलाया जा रहा है। असिस्टेंट कमिश्नर वीके वर्मा ने बताया कि कई जगह कार्रवाई की गई है, इसकी रिपोर्ट संकलित की जा रही है।





