इंडिया का स्विट्जरलैंड, विदेशी तक देखते रह जाते हैं खूबसूरत नजारे
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है, यह बात तो सब जानते हैं पर क्या आप जानते है दिल्ली के बेहद करीब भारत में मिनी स्विट्जरलैंड भी है। भारत का यह मिनी स्विट्जरलैंड इतना खूबसूरत है कि विदेशी तक यहां के नजारे देखते नहीं थकते।यकीनन जो लोग इसके बारे में नहीं जानते उन्हें सुनकर थोड़ा अटपटा जरूर लग सकता है कि आखिर भारत में ऐसा कौन सा मिनी स्विट्जरलैंड है; तो ऐसे लोगों को बता दें कि भारत के उत्तराखंड के चमोली में स्थित औली भारत की सबसे खूबसूरत जगह में से एक है। यहां कि वादियां और पहाड़ देखकर आपको यह महसूस होगा कि आप सच में स्विट्जरलैंड की सैर कर रहे हैं। हर साल कुदरत के इस नायाब उपहार को निहारने के लिए आने वाले लोगों की भीड़ में कभी कोई कमी नहीं रहती बल्कि यह बढ़ती ही रहती है। बर्फ पर स्कीइंग का आनंद लेने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां खींचे चले आते हैं। 

12 महीने औली लगता है खूबसूरत
औली को सर्दियों के मौसम में ही नहीं बल्कि इसकी सुंदरता को निहारने पर्यटकों की भीड़ बारह महीने यहां आती रहती है। बर्फ की सफेद चादर ओढ़े पहाड़ों पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त का नजारा, यहां देखने लायक रहता है। औली हर समय अपने एक अलग रंग में खूबसूरती बिखेरता नजर आता है।
औली को सर्दियों के मौसम में ही नहीं बल्कि इसकी सुंदरता को निहारने पर्यटकों की भीड़ बारह महीने यहां आती रहती है। बर्फ की सफेद चादर ओढ़े पहाड़ों पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त का नजारा, यहां देखने लायक रहता है। औली हर समय अपने एक अलग रंग में खूबसूरती बिखेरता नजर आता है।
उत्तराखंड का स्वर्ग
चमोली में बने इस हिम क्रीड़ा स्थल को उत्तराखंड का स्वर्ग भी कहा जाता है। पूरी दुनिया इसे बेहतरीन स्की रिजॉर्ट के रूप में जानती है। कुदरत की खूबसूरती को करीब से महसूस करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए औली कुदरत के किसी वरदान से कम नहीं है।
चमोली में बने इस हिम क्रीड़ा स्थल को उत्तराखंड का स्वर्ग भी कहा जाता है। पूरी दुनिया इसे बेहतरीन स्की रिजॉर्ट के रूप में जानती है। कुदरत की खूबसूरती को करीब से महसूस करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए औली कुदरत के किसी वरदान से कम नहीं है।
स्कीइंग रेस
उत्तराखंड में स्थित औली ही एकमात्र स्थान है, जिसे एफआइएस ने स्कीइंग रेस के लिए अधिकृत किया हुआ है।दरअसल, एफआइएस के मानकों के अनुसार स्कीइंग रेस के लिए केंद्रों में ढलान, बर्फ बनाने की वैकल्पिक व्यवस्था, विदेशी खिलाडियों को ठहराने की अच्छी व्यवस्था आदि की स्थिति देखी जाती है। औली इन सभी मानकों पर खरा उतरता है। यहां स्कीइंग के लिए 1300 मीटर लंबा स्की ट्रैक है, जो फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्कीइंग के मानकों को पूरा करता है।
उत्तराखंड में स्थित औली ही एकमात्र स्थान है, जिसे एफआइएस ने स्कीइंग रेस के लिए अधिकृत किया हुआ है।दरअसल, एफआइएस के मानकों के अनुसार स्कीइंग रेस के लिए केंद्रों में ढलान, बर्फ बनाने की वैकल्पिक व्यवस्था, विदेशी खिलाडियों को ठहराने की अच्छी व्यवस्था आदि की स्थिति देखी जाती है। औली इन सभी मानकों पर खरा उतरता है। यहां स्कीइंग के लिए 1300 मीटर लंबा स्की ट्रैक है, जो फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्कीइंग के मानकों को पूरा करता है।
यहां के रोपवे की है ये खासियत
एशिया में गुलमर्ग रोपवे को सबसे लंबा माना जाता है, जबकि इसके बाद औली-जोशीमठ रोपवे का नंबर है। करीब 4.15 किलोमीटर लंबे इस रोपवे की आधारशिला 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी और यह 1994 में बनकर तैयार हुआ।
एशिया में गुलमर्ग रोपवे को सबसे लंबा माना जाता है, जबकि इसके बाद औली-जोशीमठ रोपवे का नंबर है। करीब 4.15 किलोमीटर लंबे इस रोपवे की आधारशिला 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी और यह 1994 में बनकर तैयार हुआ।
स्लीपिंग ब्यूटी
औली के ठीक सामने का पहाड़ बर्फ से ढकने पर लेटी हुई युवती का आकार ले लेता है। इस दृश्य को देखना और कैमरों में कैद करने के लिए होड़ लगी रहती है। इसे ही स्लीपिंग ब्यूटी के नाम से जानते हैं।
औली के ठीक सामने का पहाड़ बर्फ से ढकने पर लेटी हुई युवती का आकार ले लेता है। इस दृश्य को देखना और कैमरों में कैद करने के लिए होड़ लगी रहती है। इसे ही स्लीपिंग ब्यूटी के नाम से जानते हैं।
दुनिया की सबसे ऊंची कृत्रिम झील
विश्वभर में सबसे अधिक ऊंचाई पर कृत्रिम झील औली में ही स्थित है। 25 हजार किलोलीटर की क्षमता वाली इस झील को वर्ष 2010 में बनाया गया। बर्फबारी न होने पर इसी झील से पानी लेकर औली में कृत्रिम बर्फ बनाई जाती है। इसके लिए फ्रांस में निर्मित मशीनें लगाई गई हैं।
विश्वभर में सबसे अधिक ऊंचाई पर कृत्रिम झील औली में ही स्थित है। 25 हजार किलोलीटर की क्षमता वाली इस झील को वर्ष 2010 में बनाया गया। बर्फबारी न होने पर इसी झील से पानी लेकर औली में कृत्रिम बर्फ बनाई जाती है। इसके लिए फ्रांस में निर्मित मशीनें लगाई गई हैं।





