SGPC चुनाव आज, सुखबीर सिंह बादल तय करेंगे प्रधान पद के उम्मीदवार

टकसाली अकालियों का विरोध झेल रहे शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने प्रधान पद का उम्मीदवार चुनने के सभी अधिकार दे दिए हैं। शिरोमणि कमेटी के मुख्यालय तेजा सिंह समुंद्री हॉल में सोमवार देर शाम सुखबीर बादल ने कमेटी सदस्यों के साथ मीटिंग की। इस दौरान मीडिया को दूर रखा गया।SGPC चुनाव आज, सुखबीर सिंह बादल तय करेंगे प्रधान पद के उम्मीदवार

मीटिंग के बाद पत्रकारों से बातचीत में अकाली दल के प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि सुखबीर बादल को कमेटी प्रधान के उम्मीदवार चुनने के सभी अधिकार मिल गए हैं। सुखबीर बादल ने पिछले कुछ दिनों से कमेटी मेंबर्स के साथ प्रधान पद के नाम पर चर्चा की थी। आज की मीटिंग में कमेटी सदस्यों ने सुखबीर बादल पर पूरा भरोसा जताते हुए उन्हें प्रधान चुनने के अधिकार दे दिए हैं। कमेटी सदस्यों की भावना को ध्यान में रखकर कमेटी के प्रधान चुना जाएगा। कमेटी के प्रधान के नाम लिफाफे से नहीं निकलेगा।

बाद में सुखबीर बादल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के दोषियों को सजा मिले। इसके लिए उन्होंने अरदास भी की है। कांग्रेस सरकार बेअदबी के मुद्दे पर राजनीति कर रही है। सुखबीर ने कहा कि मेरे पास जेड प्लस सुरक्षा है। उनकी हर एक मूवमेंट की जानकारी  पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी को रहती है। मैं कहां-कहां गया, इसकी जानकारी रिकॉर्ड देख कर ही हो सकती है। डॉ. रतन सिंह अजनाला और रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा के आरोपों को नकारते हुए सुखबीर ने कहा कि विशेष जांच कमेटी की जांच में सच सामने आ जाएगा।

उन्होंने कहा कि रंजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट को खुद पंजाब सरकार ने नकार दिया है। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि रंजीत सिंह आयोग की जांच को मान्यता नहीं दी जा सकती। पंजाब सरकार सिख कौम की भावना के साथ खिलवाड़ न कर जांच में राजनीति न करे।

सुखबीर ने कहा कि वह डॉ. अजनाला और ब्रह्मपुरा का पूरा सम्मान करते हैं। वह टकसाली हैं तो पार्टी के कारण। मेरे पिता प्रकाश सिंह बादल ने पार्टी की सेवा 70 साल की। उनको 31 साल हो गए पार्टी की सेवा करते हुए। पार्टी में अनुशासन जरूरी है। पार्टी ने ही उनको निकाला है। यदि वह भी पार्टी में नहीं होंगे तो उनकी कोई भी पहचान नहीं है। इस अवसर पर बीबी जागीर कौर, बलविंदर सिंह भूंदड़ और सिकंदर सिंह मलूका भी थे।

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