सरकारी स्कूल में पढ़कर दूसरों के मसीहा बने भूपेंद्र सिंह राठौर
कौन कहता है कि सरकारी स्कूल में पढ़कर कामयाबी का परचम नहीं लहराया जा सकता? कौन कहता है कि गरीब परिवार का बच्चा बड़ा नाम नहीं कमा सकता? कौन कहता है कि गांव में पढ़ा-लिखा बच्चा शहर के बड़े लोगों के साथ खड़ा नहीं हो सकता? ये सब कर दिखाया है भूपेंद्र सिंह राठौर ने। जी हां, भूपेंद्र सिंह राठौर आज मोटिवेशनल स्पीकर और बिज़नेस कोच हैं।
Ghamasan.com से ख़ास बातचीत में भूपेंद्र जी ने बताया कि कैसे वह एक छोटे से गांव से निकलकर आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
गांव में बीता बचपन-
भूपेंद्र सिंह राठौर राजस्थान स्थित किशनगढ़ के खतौली गांव के रहने वाले हैं। भूपेंद्र जी की पूरी पढ़ाई किशनगढ़ के सरकारी स्कूल और सरकारी कॉलेज से हुई हैं भूपेंद्र जी एक लोअर मिडिल क्लास फैमिली से हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिताजी खेती करते थे और बाद में होटल इंडस्ट्री में मेनेजर के पद पर नौकरी की।
सबसे बड़ी चुनौतियां-
भूपेंद्र जी ने बताया कि गांव और लोअर मिडिल क्लास फैमिली से होने के कारण उनके सामने कई चुनौतियां थी, जैसे इंग्लिश नहीं आना, आत्मविश्वास की कमी, नेगेटिव होना, छोटा सोचना, कु छ पैसे वाले लोगों को बड़ा समझना। भूपेंद्र जी का सपना सेना में जाने का था लेकिन किसी कारणों से वह पूओरा नहीं हो सका।
आर्मी ज्वाइन करने के लिए भूपेंद्र जी ने NCC ज्वाइन किया। NCC के पहले साल में वह बहुत अच्छे परफ़ॉर्मर रहे। लेकिन दूसरे साल जानकारी नहीं होने के कारन उनका एडमिशन नहीं हो सका और उनका सपना अधूरा रह गया।
चुनौतियों की ऐसे किया पार-
सेना में जाने का सपना टूटने के बाद भूपेंद्र जी ने कंप्यूटर कोर्स किया। इस दौरान भी उनके सामने यही चुनौतियां रही कि इंग्लिश नहीं आना, सबके सामने नहीं बोल पाना, बातचीत नहीं करना, लेकिन फिर भी वह इंस्टिट्यूट में नंबर वन रहे। इस दौरान उन्होंने एक पॉवरपॉइंट कम्पटीशन जीता जिसके कारण पहली बार न्यूज़पेपर में उनका नाम आया।
इसके बाद उनका कॉन्फिडेंस बड़ा और वह कुछ और अच्छा करने लगे. लेकिन जब भी इंटरव्यू देने जाते तो इंग्लिश नहीं आने के कारण सिलेक्शन नहीं हो पाता। भूपेंद्र जी ने जिस इंस्टिट्यूट से कंप्यूटर कोर्स सिखा वाही 2-3 महीने नौकरी की। इसके बाद उन्होंने दूसरे इंस्टिट्यूट में टीचर के तौर पर नौकरी की। इस इंस्टिट्यूट से उन्हें कोलगेट पर्मालियम इंडिया लिमिटेड में नौकरी लगी। दो-तीन साल काम करने के बाद भी उनकी सैलरी नहीं बढ़ी। इसके बाद उन्हें लगा कि अब इंग्लिश को इम्प्रूव करना होगा और आगे बढ़ना होगा।
इसके बाद भूपेंद्र जी ने इंग्लिश इम्प्रूव करना शुरू किया और गुड़गांव में आ गए। जब उनकी इंग्लिश अच्छी हुई तो उनकी जॉब पुणे में मेंटेक सॉफ्टवेर कंपनी में लग गई है और यहां उन्हें 25 से 30 हजार रूपये सैलरी मिलने लगी। लेकिन यहां भी उन्हें कांफिडेंस नहीं था, वह लोगों से बात नहीं कर पाते थे।
इसके बाद भूपेंद्र जी ने पब्लिक के सामने बोलना सीखना शुरू किया। जब वह पब्लिक के सामने बोलने लगे तो उन्हें पॉजिटिव रिसपोंस मिलने लगा। दों साल तक भूपेंद्र जी ने कांफिडेंस कैसे बढ़ना है और पब्लिक के सामने बोलना सीखा। इसके बाद उन्हें समझ में आया कि वह बहुत कुछ कर सकते हैं। 2008 में उन्होंने ठाना कि उन्हें स्पीकर बनना है। इसके बाद उन्होंने ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए।
साल 2010 में उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और पूरी तरह से मोटिवेशनल स्पीकर बन गए। भूपेंद्र जी ने बताया कि उके परिवार वाले इससे खुश नहीं थे लेकिन उन्हें उनका सपना पूरा करना था। सपना पूरा करने के लिए उन्होंने जॉब छोड़ दी। इसके बाद धीरे-धीरे वह अपने पैरों पर खड़े होने लगे।
उन्होंने अपनी वेबसाइट खुद बनाई, सेल्स खुद किया,इन्टरनेट पर मार्केटिंग सीखी, चीजों को बेचना सीखा। उन्होंने बताया कि उनके गुरु हमेशा कहते थे कि ‘करो तो कमाल का करो, नहीं तो मत करो’ और इसलिए वह हमेशा बहुत बढ़िया करने की कोशिश करते थे।
इतनी मुश्किलों को पार करने के बाद आज भूपेंद्र जी देश-विदेश में लोगों को ट्रेनिंग दे रहे। पिछले 10 सालों में वह करीब 3 लाख लोगों को ट्रेंड कर चुके हैं। उन्होंने अपने सारे सपने पूरे कर लिए हैं। भूपेंद्र जी की एक किताब भी छपी है जिसका नाम है “master of your thoughts, Master of your life’.
भूपेंद्र जी केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ट्रेनिंग देते हैं। दुबई, इंडोनेशिया, सिंगापुर में उनके ट्रेनिंग प्रोग्राम होते हैं।





