लखनऊ.समाजवादी पार्टी में बसपा के बागी नेता इन्द्रजीत सरोज अपने 94 साथियों समेत गुरुवार को शामिल हुए। इस मौके पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा सपा के दरवाजे सबके लिए खुल गए हैं लेकिन जब मुख्तार अंसारी जैसे नेताओं को सपा में शामिल होने देंगे का सवाल हुआ तो उन्होंने गोलोमोल जवाब दिया। जबकि पूरे कार्यक्रम के दौरान अखिलेश मायावती पर हमलावर नहीं हुए। सीनियर पॉलिटिकल जर्नलिस्ट ज्ञानेंद्र शर्मा और रतन मणि लाल से बात कर इसके मायने जाने।
चुनाव के नतीजों ने सबक दिया
– एक्सपर्ट्स ने बताया कि अखिलेश को चुनावी हार ने बड़ा सबक दिया है। यही वजह है कि उन्होंने एलान कर दिया है कि अब उन्हें किसी दूसरी पार्टी के नेता के आने से कोई परहेज नहीं है।
– अखिलेश ने यूपी चुनाव से पहले जो स्टैंड मुलायम के सामने लिया था, उसमे अपराधियों को पार्टी में ना लेना एक बड़ा मुद्दा था। फिर चाहे वह डीपी यादव हो या फिर मुख्तार अंसारी हो। लेकिन जब टिकट बांटे गए तो कई ऐसे नेताओं को टिकट दिया जिन पर गंभीर आरोप थे।
– यह हर पार्टी में होता है कि बोलना कुछ है और करना कुछ है। हर पार्टी में 25 से 30 फ़ीसदी अपराधी होते ही हैं।
– अगर सब अपराधी छांट देंगे तो पार्टी में बचेगा कौन।
ऐसा काम करना चाहते हैं की मिसाल बने
– एक्सपर्ट्स का कहना है कि अखिलेश यादव ने पार्टी को हाईजैक तो कर लिया, लेकिन अब पार्टी के अन्दर भी लोगों के जाने से बेचैनी है।
– ऐसे में अखिलेश ऐसे काम करना चाहते हैं जो मिसाल बने। यही वजह है कि उन्होंने अब सबके लिए दरवाजे खोल दिए हैं।
– दरअसल, अभी तक मुलायम डिसाइड करते थे कि किसे लेना है किसे नहीं लेना है। अखिलेश ने अपनी छवि के लिए चुनावों से पहले अंसारी बंधुओं का विरोध किया था, लेकिन क्या अब अखिलेश इस कंडीशन में हैं। जवाब न ही आएगा।
भविष्य को देख कर राजनीति में जुटे हैं अखिलेश
– वहीं, एक्सपर्ट्स ने कहा कि मायावती पर अखिलेश का हमलावर न होना भविष्य की रणनीति बताता है। यह सही है कि विधानसभा हार के बाद एक सॉफ्ट कार्नर एक दुसरे के प्रति दोनों दलों में पैदा हुआ है।
– लेकिन यह सॉफ्ट कार्नर किसी गठबंधन में तब्दील हो पाता है या नहीं यह आगे होने वाले उपचुनावों तक पता चल जाएगा।
– दरअसल, योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्या का संसद से इस्तीफा देने के बाद गोरखपुर और फूलपुर सीट खाली हो गई है। जहां अगले छह महीनों में चुनाव होने हैं।