इस लड़की की सुनाई नहीं देती थी धड़कन, ऑपरेशन हुआ तो खुला ये राज
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इंदौर.महज 10 माह की उम्र और उस पर दिल की बीमारी ऐसी जो 10 लाख में किसी एक को होती है। कनक दिल में छेद के जटिल ऑपरेशन के बाद घर जा चुकी है, लेकिन वह नहीं जानती कि इंदौर के अस्पताल में उसके ऑपरेशन से चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक इतिहास रचा जा चुका है।

भारत में सालभर में ऐसे सिर्फ 2-3 मामले ही सामने आते हैं। कनक के दिल में सिर्फ बड़ा छेद ही नहीं था बल्कि उसका दिल भी समान्य से विपरीत दाईं ओर तो था। साथ ही लिवर व दूसरे महत्वपूर्ण अंग भी मिरर इमेज की तरह सामान्य से उल्टी दिशा में थे। मेडिकल साइंस की भाषा में इस बीमारी को साइटस इनवर्सस कहा जाता है। धार जिले के बाकानेर गांव के लाखन प्रजापति की बेटी कनक अब घर जा चुकी है। इसकी बीमारी का पता लगाना तो दूर बड़वानी जिला अस्पताल के डॉक्टर जांच के बावजूद यह तक नहीं जान पाए थे कि कनक के सभी महत्वपूर्ण अंदरूनी अंग सही जगहों पर न होकर शरीर के दूसरी तरफ हैं।आखिरकार मामला इंदौर के डॉक्टर धीरज गांधी तक पहुंचा। वह यह देखकर दंग रह गए कि यहां तो दिल का मामला ही उल्टा है। आखिरकार एक टीम बनाई गई जिसमें डॉक्टर एडी भटनागर, डॉ एम अग्रवाल, डॉ आशीष, डॉ प्रकाश और जोसेफ शामिल थे। भंडारी अस्पताल में 4 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान कई नाजुक मौके आए, आखिरकार ऑपरेशन सफल रहा। कनक अब बाकानेर लौट चुकी है। पर वह इतिहास बनने जा रही है। उसके ऑपरेशन का प्रजेंटेशन अगले वर्ष फरवरी में विशाखापट्टनम में हार्ट सर्जन्स की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भी किया जाएगा।एक चूक और जिंदगीभर के लिए रह जाती आधी धड़कन
ऑपरेशन करने वाली टीम के डॉक्टर बताते हैं कि चालीस साल के अनुभव में उन्होंने ऐसे तीन-चार मामले ही देखे हैं, चूंकि कनक के सारे अंदरूनी अंग विपरीत दिशा में थे इसलिए सामान्यतः: सीधे हाथ पर खड़े होकर सर्जरी करने के बजाए बाईं ओर खड़े होकर सर्जरी करनी पड़ी। सारे असिस्टेंट दूसरी दिशा में खड़े थे। ऐसा समझिए जैसा आइने में सबकुछ उलटा दिखता है दिल को भी हमें उसी नजर से देखना था। हार्ट का सबसे संवेदनशील कंडक्शन बंडल भी उल्टा था। सर्जरी के दौरान यदि एक मिलीमीटर की चूक भी हो जाती तो बच्ची की धड़कन आधी होकर 40 के आसपास ही रह जाती और उसे जिंदगीभर के लिए पेसमेकर लगाना पड़ता।धड़कन ही नहीं सुनाई देती थी बच्ची की
मजदूरी कर गुजारा करने वाले लाखन प्रजापति कहते हैं कि तीन- चार महीने तो कनक ठीक रही, फिर बीमार रहने लगी। बड़वानी अस्पताल में दिखाया, एक्सरे भी हुआ पर कोई डॉक्टर पकड़ ही नहीं पाया कि दिल दाईं तरफ है। फिर हम बड़ोदा गए तब पकड़ में आया। पैसा नहीं होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पाया। फिर हम इंदौर आए, कुछ सहायता मुख्यमंत्री से मिली, बाकी खर्च अस्पताल ने उठाया।
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विदेश में ऐसे मरीज पहनते हैं टैग
साइटस इनवर्सस के अधिकतर मामले तो सामने आ ही नहीं पाते और कनक जैसे ज्यादातर मामलों में मरीज दस माह की उम्र तक जी ही नहीं पाता। विदेशों में ऐसे मरीज एक विशेष निशान वाला लॉकेट या ब्रेसलेट (टैग) पहनते हैं। ऐसा इसलिए ताकि आपात स्थिति में जब मरीज इस बारे में बता पाने में समर्थ न हो तो डॉक्टर सही इलाज कर सके। इसे ऐसे समझिए कि जिसके गले में यह लॉकेट होता है तो डॉक्टर समझ जाता है कि उसके अंदरूनी अंग विपरीत दिशा में हैं।फेफड़े का प्रेशर बहुत ज्यादा था
दिल के छेद का आकार तो बहुत बड़ा था ही एक गंभीर समस्या यह भी थी कि फेफड़े का प्रेशर 80 को पार कर रहा था। सामान्यतः: यह 20-25 के आसपास होता है। ऐसे में ऑपरेशन करना मुश्किल हो जाता है। टीम के प्रयास से यह सफलता मिली।
डॉ. धीरज गांधी, हार्ट सर्जन भंडारी अस्पताल





