हफ्ते में एक फिल्म देखने की वजह से आज हॉलीवुड में कर रहीं नाम रौशन

एक लड़की जिसने अपने स्कूली दिनों में हफ्ते में एक फिल्म देखने का फैसला किया। उसे खुद भी नहीं पता था कि उसका यह फैसला जिंदगी बदलने वाला है। ना केवल भारतीय सिनेमा बल्कि विश्व सिनेमा में भी उसका योगदान होने वाला है। हम बात कर रहे हैं कला निर्देशक आश्रिता कामत की।

हफ्ते में एक फिल्म देखने की वजह से आज हॉलीवुड में कर रहीं नाम रौशन

आश्रिता का जन्म कोलकता में हुआ, बाद में उनका परिवार चेन्नई शिफ्ट हो गया जहां उनका बचपन बीता। आश्रिता ने यहां के ऋषि वैली स्कूल से पढ़ाई की जिसके बाद वो मुंबई चली गईं और सेंट जेवियर कॉलेज से सोशियोलॉजी में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की।

 मुंबई में पढ़ाई के दौरान ही आश्रिता का लगाव फिल्मों की ओर बढ़ता गया और जल्दी ही उन्होंने बॉलीवुड में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर कई एड फिल्मों में काम किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात प्रोडक्शन डिजाइनर आराधना सेठ से हुई। आश्रिता ने बताया कि आराधना सेठ के साथ काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि सेट डिजाइनिंग में उनकी विशेष रुचि है और उन्हें कला निर्देशक के तौर पर काम करना चाहिए।

कला निर्देशक के तौर पर आश्रिता की मुख्य फिल्मों में से एक ‘वेस्ट इज वेस्ट‘ और ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा‘ है। बॉलीवुड में पहचान बनाने के बाद आश्रिता ने हॉलीवुड का रुख किया। फिलहाल वो लॉस एंजलिस में हैं और बतौर कला निर्देशक जेम्स कैमरुन की ‘अवतार’ सीरीज की फिल्म में काम कर रही हैं।

अपनी सफलता का श्रेय आश्रिता कामत अपनी मां को देती हैं जो खुद ग्राफिक डिजाइनर हैं। उनकी वजह से डिजाइन में आश्रिता की विशेष रुचि है। उनका मानना है कि पारिवारिक माहौल की वजह से उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला और घर के लोगों ने हमेशा उनका समर्थन किया।

 

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