सृजन में लोग इसे कहते थे लेडी डॉन, कहती थी- ‘आप खुद आएंगे या गाड़ी भिजवाकर उठवा लूं’…
पटना.सजृन घोटाले की जांच कर रही पुलिस को घोटाले की मास्टर माइंड मनोरमा देवी का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। बात नहीं मानने वाले अधिकारियों को वो जान से मारने की धमकी दिया करती थी।उसके आतंक का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि लोग उसके खिलाफ अपनी शिकायत लेकर थाने तक भी नहीं जाते थे।

आप खुद आएंगे या गाड़ी भिजवाकर उठवा लूं….
आप खुद आएंगे या गाड़ी भिजवाकर उठवा लूं.. कुछ इसी अंदाज में मनोरमा देवी सरकारी अधिकारियों से बात किया करती थी। पुलिस की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। बैंक ऑफ बड़ौदा के स्केल टू ऑफिसर अतुल रमन ने मनोरमा देवी के खौफ की कहानी पुलिस को बताया है। रमन ने पुलिस को बताया कि लाखों रुपये के सरकारी खातों की राशि गबन की मास्टर माइंड सृजन संस्था की मनोरमा देवी का अधिकारियों के बीच में खौफ था। वो गलत काम करने के लिए पैसे का प्रलोभन भी दिया करती थी। बात नहीं मानने पर मनोरमा देवी अपने गुंडे उसके घर पर भेज दिया करती थी। वह खुद भी घर पहुंच धमकी देती थी।
बिना रोक टोक के पास होता था चेक
अतुल रमन का कहना था कि बैंक ऑफ बड़ौदा भागलपुर में जब मैं ज्वाइन किया था तो मुझे सीनीयर मैनेजर ने पहले ही हिदायत दे दी थी कि वह सृजन के खातों के बारे में किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं करे। साथ ही सृजन से जुड़े जो भी चेक आए उसे बिना किसी रोक टोक के पास कर दिया जाए। शुरूआती दिनों में मैंने इन सब कामों से अलग रखा, लेकिन एक दिन मनोरमा देवी का फोन आया और उसे अपने यहां आने को कहा। इंकार करने पर मनोरमा देवी ने कहा था कि आप खुद आएंगे या गाड़ी भिजवाकर उठवा लूं।
फंसाने की देती थी धमकी
पुलिस सूत्रों का कहना है कि बात नहीं मानने वाले सरकारी कर्मचारियों को मनोरमा फंसाने की धमकी भी देती थी। जिला प्रशासन के कर्मियों की मिलीभगत से पदाधिकारियों से चेक पर धोखे से हस्ताक्षर कराकर उसे ब्लैकमेल करती थी। यदि पदाधिकारी गड़बड़ी की शिकायत करने की बात कहते थे तो मनोरमा कहती थी। यह गड़बड़ी आपके स्तर से हुई है। इसमें फंसेंगे तो सभी लोग जेल जाएंगे क्योंकि आपका ही हस्ताक्षर ही उस चेक पर है।
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जबरन दिया करती थी पैसा
मनोरमा देवी के बारे में पकड़ाए आरोपितों ने कहा कि विभाग में जब गलत करने से कोई मना करता था तो उसके घर वह खुद मोटी नकद राशि भिजवा देती थी। सृजन घोटाले के आरोपी अरुण गुप्ता ने पुलिस को बताया कि मनोरमा की मृत्यु के बाद भी 31 मार्च 2017 को उनका पुत्र अमित कुमार, उसका भाई और नाजिर महेश मंडल ने विभाग में आए आवंटन का चेक सृजन के खाते में देने को कहा। इस बात पर तैयार नहीं होने पर उन लोगों ने घर पर 30 लाख रुपये रखवाया और डरा धमका कर सृजन के खाते में पैसा जमा करवा दिया था।





