शोध से हमें परिवेश की सही वस्तु स्थिति का होता है आभास

लखनऊ। श्री जय नारायण महाविद्यालय में बुधवार को ‘रिसर्च मेथडोलोजी’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशााला में महाविद्यालय के रिसर्च सेल के शिक्षकों, शोधार्थियों व परास्नातक कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के विशिष्टता संवर्धन किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग के प्रो. राजीव पाण्डेय ने शोध में सांख्यिकी के उपयोग एवं सार्थकता को समझने का प्रयास किया।
आउटलियर, आंकड़ों के अध्ययन को और प्रासंगिक बनाते हैं : प्रो. राजीव पाण्डेय
इस अवसर पर उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि, हम लोग आंकड़ों का अध्ययन करते समय आउटलियर की उपेक्षा कर देते हैं जो की उचित नहीं है। जबकि आउटलियर, आंकड़ों के अध्ययन को और प्रासंगिक बनाते हैं। उन्होंने सांख्यिकीय विश्लेषण में सहायक एवं प्रचलित कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एसपीएसएस के प्रयोग से सभी को अवगत कराया। प्रो. पाण्डेय ने उचित सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए, उचित टूल की चयन प्रकिया और आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। व्याख्यान के अंत में प्रो.पाण्डेय ने श्रोताओं के अनेक प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओ को संतुष्ट किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.एसडी शर्मा ने कहा कि शोध से हमें परिवेश की सही वस्तु स्थिति का आभास होता है जिससे हमे सम्बंधित एवं विश्वसनीय निर्णय बनाने में बहुत मदद मिलती है। प्रो. शर्मा ने अतिथि वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि प्रो. राजीव ने शोध प्रक्रिया से जुड़े लगभग तीन हज़ार व्याख्यान देश एवं विदेशों में देते हुए शिक्षा जगत की बड़ी सेवा की है।
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कार्यशाला का संचालन रिसर्च सेल की डॉ. समन खान ने किया। कार्यशाला के सफल समापन पर डॉ. अरुण मिश्रा महाविद्यालय परीक्षा व प्रवेश प्रभारी ने किया। इस अवसर पर रिसर्च सेल के सदस्य डॉ. अंजलि चौहान, डॉ. प्रवीण कुमार, कला संकाय प्रभारी डॉ. एससी हजेला, डॉ. केके शुक्ल, डॉ.विनोद चन्द्र, डॉ. भारती पाण्डेय, डॉ. पायल गुप्ता, सहित अनेक शिक्षक, शोधकर्ता व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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