वो बॉलर, जिसके फेंके एक ओवर ने भारतीय खिलाड़ियों को खाने पड़े पत्थर

1999 का वर्ल्ड कप मैच. इंडिया के सामने जिम्बॉब्वे. इस मैच में एक बॉलर ने 5 गेंदों के अंदर 3 विकेट झटक कर इंडिया के मुंह से मैच छीन लिया था. बल्कि यूं कहिए हलक में हाथ डाल कर मैच निकाल लिया था. इस हार से भारतीय समर्थक इतने हत्थे से उखड़े कि उन्होंने अपने खिलाड़ियों के पुतले जलाए. उनके घरों पर पत्थर फेंके. इस सारे आक्रोश को ट्रिगर करने वाला ओवर, जिम्बॉब्वे के फास्ट बॉलर हेनरी ओलंगा ने फेंका था.वो बॉलर, जिसके फेंके एक ओवर ने

हेनरी ओलोंगा.

उस मैच को हर भारतीय भूलना चाहता है, लेकिन भूल नहीं पाता

सीधे मुद्दे पर आते हैं. इस वर्ल्ड कप के पहले मैच में इंडिया साउथ अफ्रीका से हार चुकी थी. दूसरा मैच सचिन तेंडुलकर नहीं खेल रहे थे. वो अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वापसी की फ्लाइट पर थे. जिम्बॉब्वे भारत के मुकाबले कमज़ोर टीम मानी जाती थी. सो सभी को उम्मीदें थी कि इंडिया आसानी से जीत लेगी. आसानी से तो नहीं, लेकिन थोड़ी मेहनत से इंडिया जीतती नज़र आ रही थी.

सारे मैच का हाल नहीं बताते हैं. सीधे क्लाइमैक्स पर चलते हैं. 253 रन का टार्गेट चेज़ करती इंडिया के एक वक़्त पर 175 रन पर 6 विकेट गिर चुके थे. वहां से रॉबिन सिंह और नयन मोंगिया ने मैच संभाला. मोंगिया के आउट होने के बाद भी रॉबिन सिंह डटे रहे. भारत मैच जीतने की कगार पर पहुंच चुका था. सिर्फ 9 रन चाहिए थे. 12 गेंदें बची थीं. 3 विकेट हाथ में थे. कप्तान एलिस्टर कैम्पबेल ने गेंद थमाई हेनरी ओलंगा के हाथ में. यही वो घातक ओवर था.

उन छः गेंदों की कहानी, जिसने पूरे इंडिया को रुलाया

पहली गेंद पर रॉबिन सिंह ने 2 रन ले लिए.

दूसरी गेंद को ड्राइव करने के चक्कर में थे. गेंद ने एज लिया और सर्किल के अंदर कप्तान ने डाईव लगाते हुए उम्दा कैच पकड़ा. 7 रन, 10 गेंदे, 2 विकेट.

नए बल्लेबाज़ कुंबले ने अपनी पहली ही गेंद पर एक रन लेकर स्ट्राइक श्रीनाथ को दी. श्रीनाथ अच्छा खेल रहे थे. तब तक 10 गेंदों में 16 रन बना चुके थे. उनसे ज़्यादा उम्मीदें थी.

अगली गेंद पर उन्होंने 2 रन ले लिए. अब सिर्फ 4 रन चाहिए थे. 8 गेंदें बाकी थी. 2 विकेट हाथ में थे.

ओलंगा ने पांचवीं गेंद डाली. श्रीनाथ एक ही गेंद में मैच ख़त्म करने के चक्कर में थे. उन्होंने बल्ला घुमाया. गेंद उनके बैट और पैड के बीच से घुसती हुई स्टंप्स पे जा लगी. भारतीय खेमे में सन्नाटा फ़ैल गया. सबको पता था अगले बल्लेबाज़ वेंकटेश प्रसाद हैं. जिनकी बल्लेबाज़ी उतनी ही अच्छी थी, जितनी हिमेश रेशमिया की एक्टिंग.

ओलंगा अपनी आख़िरी गेंद लेकर दौड़े. महा-नर्वस प्रसाद क्रीज़ में इधर-उधर होने लगे. चहलकदमी करते हुए लेग स्टंप से ऑफ स्टंप की तरफ आए. ओलंगा ने गेंद फेंकी. वो प्रसाद के पैड से आकर टकराई. अभी ओलंगा की अपील पूरी भी नहीं हुई थी कि अंपायर ने उंगली उठा दी. भारत 3 रन से मैच हार गया था. ओलंगा जिम्बॉब्वे क्रिकेट के नए पोस्टर ब्वॉय बन गए थे.

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