रोस्टर के विरोध में लखनऊ विश्वविद्यालय व बाबा साहब आंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्र

लखनऊ । हजरतगंज स्थित जीपीओ पर लखनऊ विश्वविद्यालय और बाबा साहब अम्बेडकर विश्वविद्यालय के छात्र व छात्राओं ने भाजपा साकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया । इसके साथ ही प्रदर्शन कर छात्रों ने बताया कि 22 जनवरी को 13 प्वाइंट रोस्टर के मामले में भाजपा सरकार ने न्यायालय में कमजोर पक्ष रखकर इस रोस्टर को लागू करा दिया है ।
रोस्टर के कारण अब विश्वविद्यालयों में विभाग को यूनिट मानकर नियुक्तियां होंगी
इसके साथ ही उनका कहना है कि इस रोस्टर के कारण अब विश्वविद्यालयों में विभाग को यूनिट मानकर नियुक्तियां होंगी, जबकी पहले 200 प्वाइंट के नियम से विश्वविद्यालय को यूनिट मानकर नियुक्तियां की जाती थी। उन्होंने बताया विभाग को यूनिट मानने से दलित-पिछड़ों-आदिवासियों का प्रोफेसर बनने का सपना कभी पूरा नही हो पायेगा । अगर एक विभाग में तीन नियुक्तियां आयेंगी तो तीनों ही आरक्षण के दायरे से बाहर रहेंगी। इसका मतलब तीनों सीटों पर सामान्य वर्ग मतलब सवर्ण समाज के किसी व्यक्ति को नौकरी मिलेगी ।
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रोस्टर के नियमानुसार आरक्षण नियम तब लागू होगा जब एक विभाग में चार सीटें आयेंगी
वहीं उनका कहना है इसके साथ ही हकिकत ये भी है कि शायद ही कभी एक साथ किसी विभाग में तीन पदों की नियुक्तियां आये । इस रोस्टर के नियमानुसार आरक्षण नियम तब लागू होगा जब एक विभाग में चार सीटें आयेंगी वो भी पिछड़ों के लिये होगी इसके बाद पांचवी व छठी सीट फिर ये सवर्ण समाज यानी जनरल श्रेणी को जाएगी ।
रोस्टर के हिसाब आदिवासी समाज को बिल्कुल ही अछूत बना दिया
साथ ही कहा कि इसी तरह सातवीं सीट एससी व आठवीं सीट पिछड़े वर्ग को जायेगी लेकिन अभी तक एसटी वर्ग इस दायरे में नही आ सका है क्योंकि इस नियम के अनुसार एसटी के लिये पंद्रह पदों की नियुक्ति जरूरी है । तब एसटी को एक सीट मिलेगी जबकी इस तेरह प्वांइट रोस्टर के हिसाब आदिवासी समाज को बिल्कुल ही अछूत बना दिया है । हर संगठन व विश्वविद्यालयों के शोध छात्रों ने वक्ता के रूप में अपनी बात रखी है । इस व्यवस्था के विरोध में कई संगठनों के लोग शामिल हुए।





