मोदी सरकार में रुपया हो रहा है मजबूत लेकिन इससे हो रहा है देश को बहुत नुकशान…जाने वजह

मुद्रास्फीति काबू में होने के बावजूद रुपये की कीमत उसके वास्तविक मूल्य से ज्यादा है, जिससे निर्यातकों का कारोबार प्रभावित हो रहा है. डॉलर के खिलाफ रुपये के मूल्य में बढ़ोतरी से निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी क्षमता सीधे प्रभावित होती है. एसोचैम द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह बातें कही गईं.रुपये में आ रही है मजबूती लेकिन इससे हो रहा है देश को बहुत नुकशान...जाने वजह

यह भी पढ़ें-  तेजस ट्रेन की रफ़्तार ने भारत में रचा इतिहास, पहली बार करवाया विमान जैसा एहसास

एसोचैम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “पिछले एक साल में रुपया करीब 6 फीसदी गिरा था लेकिन अगस्त में यह डॉलर के खिलाफ 66.93 की बजाए 63.63-70 के स्तर पर है. इससे स्पष्ट है कि रुपये के बाह्य मूल्य में मजबूती आई है. वहीं, दूसरी तरफ मुद्रास्फीति में पांच साल की सबसे बड़ी गिरावट के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के रिवर्स अनुपात में यह मजबूती पर बना हुआ है.”

यह भी पढ़ें- अभी-अभी: यूपी के मुज़्ज़फ़रनगर में एटीएस के हत्थे चढ़ा बांग्लादे का ये खतनाक आतंकी

इसमें कहा गया, “हां, मुद्रास्फीति कमजोर है, लेकिन अभी भी यह अपस्फिति की स्थिति है, क्योंकि कीमतों में गिरावट नहीं हुई है. इसका मतलब यह है कि रुपये से अभी भी कम वस्तुएं ही खरीदी जा सकती हैं (कम से कम 1.58 फीसदी तक), लेकिन जब इसका मूल्य डॉलर के खिलाफ नापा जाता है तो यह करीब 6 फीसदी बढ़ा है.”

Back to top button